Friday, 27 April 2018

30 अप्रैल बुद्ध पूर्णिमा पर करें ये काम, हो जाएंगे मालामाल

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

पूर्णिमा तिथि धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का दिन है। वैसे तो वर्ष की प्रत्येक पूर्णिमा अपने आप में खास होती है, लेकिन इनमें वैशाख पूर्णिमा का महत्व अधिक है, क्योंकि यह पूर्णिमा भगवान बुद्ध के अवतरण दिवस के रूप में जानी जाती है। भगवान बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार भी हैं। इस लिहाज से इस पूर्णिमा का महत्व बढ़ जाता है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल को आ रही है। इस दिन सिद्धि योग भी बन रहा है जिसमें किए गए शुभ कार्यों की पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है। इस दिन किए गए मंत्र भी तुरंत सिद्ध हो जाते हैं।


आइए जानते हैं बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान विष्णु को प्रसन्न् करके किन उपायों से धन और सिद्धि और अन्य चीजों की प्राप्ति की जा सकती है : 

  1. पूर्णिमा के दिन चंद्र अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त रहता है, इसलिए जिन लोगों को कोई मानसिक रोग है, मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं, वे इस दिन रात्रि में चांदी के बर्तन में साफ पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर रातभर चांद की चांदनी में रखें। फिर इस जल को चांदी के ही किसी बर्तन में भरकर रख लें। इस जल का थोड़ा-थोड़ा सेवन रोज करने से मानसिक रोग ठीक हो जाते हैं। इस जल में और जल मिलाते जाएं तो यह कभी समाप्त नहीं होगा। यह जल अनेक प्रकार के मानसिक रोगों में आराम देता है।
  2. पूर्णिमा के दिन मिश्री डालकर खीर बनाएं और इसे 12 वर्ष तक की सात कन्याओं का पूजन कर उन्हें खिलाएं। इससे आर्थिक सम्पन्न्ता बनी रहती है। व्यापार में लाभ होता है, नौकरी में प्रमोशन मिलता है।
  3. वैसे तो हमेशा ही घर में साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण रखना चाहिए, लेकिन पूर्णिमा के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व उठकर घर में साफ-सफाई करें। स्वयं स्नान करने के बाद घर में गंगाजल और गौमूत्र का छिड़काव करें। घर के मुख्य द्वार पर हल्दी, रोली या कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। कार्यस्थल पर भी गंगाजल का छिड़काव करें।
  4. पूजा के समय गाय के घी का दीपक जलाएं। धूप लगाएं और कपूर जलाएं। परिवार सहित देवी लक्ष्मी-विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा करें।
  5. लक्ष्मी माता को मखाने की खीर, साबूदाने की खीर या किसी सफेद मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के बाद यह प्रसाद बाटें। ध्यान रखें कि आज के दिन घर में कलह का माहौल बिल्कुल न बने।
  6. सुबह या शाम को मंदिर जरूर जाएं। हनुमानजी के सामने चमेली के तेल और पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। इस दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। 
  7. शाम के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें। धूप-दीप से उनका पूजन करें। भगवान की कृपा आप पर जरूर होगी।
  8. पूर्णिमा की रात्रि में तुलसी की माला से ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का लगातार जाप करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। धन संपत्ति की प्राप्ति होती है।


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संधिकाल में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हिंदू धर्म में दिन-रात मिलाकर कुल 8 प्रहर माने गए हैं। यानी 24 घंटे में प्रत्येक प्रहर तीन घंटे का होता है। इन प्रहरों के ठीक संधिकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। कुछ मिनट रूककर किया जाता है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों?


हिंदू धर्म में समय का बड़ा महत्व बताया गया है। किसी भी कार्य का प्रारंभ करने के लिए समय शुभ समय देखा जाता है। इसीलिए हमारे प्राचीन ग्रंथों, वेद, पुराणों में समय की सूक्ष्मतम तक गणना की गई है। यह भी सही है कि दुनिया को समय का इतना सूक्ष्म ज्ञान भारत ने ही दिया। आमतौर पर वर्तमान में सेकंड, मिनट, घंटे, दिन-रात, माह, वर्ष, दशक और शताब्दी तक की ही प्रचलित धारणा है, लेकिन हिंदू धर्म में एक अणु, तृसरेणु, त्रुटि, वेध, लावा, निमेष, क्षण, काष्ठा, लघु, दंड, मुहूर्त, प्रहर या याम, दिवस, पक्ष, माह, ऋतु, अयन, वर्ष (वर्ष के भी पांच भेद- संवत्सर, परिवत्सर, इद्वत्सर, अनुवत्सर, युगवत्सर हैं)। फिर इसके बाद दिव्य वर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प, अंत में दो कल्प मिलाकर ब्रह्मा का एक दिन और रात, तक की विस्तृत समय पद्धति वेदों में वर्णित है। 

इन्हीं में से समय का एक मान है प्रहर। हिंदू धर्म ग्रंथों में 24 घंटे के दिन-रात को मिलाकर कुल आठ प्रहर माने गए हैं। औसतन एक प्रहर तीन घंटे का होता है। यह साढ़े सात घटी का होता है। एक घटी में 24 मिनट होते हैं। इस प्रकार दिन के चार और रात के चार प्रहर मिलाकर कुल आठ प्रहर होते हैं। इन आठों प्रहरों को एक-एक नाम दिया गया है।

दिन के चार प्रहर- पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपरान्ह और सायंकाल।
रात के चार प्रहर- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा।

सूर्योदय के समय दिन का पहला प्रहर प्रारंभ होता है जिसे पूर्वान्ह कहा जाता है। दिन का दूसरा प्रहर जब सूरज सिर पर आ जाता है तब तक रहता है जिसे मध्याह्न कहते हैं। इसके बाद अपरान्ह (दोपहर बाद) का समय शुरू होता है, जो लगभग 4 बजे तक चलता है। 4 बजे बाद दिन अस्त तक सायंकाल चलता है। फिर क्रमश: प्रदोष, निशिथ एवं उषा काल। सायंकाल के बाद ही प्रार्थना करना चाहिए।

इसलिए नहीं किए जाते संधिकाल में शुभ कार्य
24 घंटे में आठ प्रहर हैं तो संधि भी आठ तरह की होती है। संधि अर्थात एक प्रहर के समाप्त होने का समय और दूसरे प्रहर के प्रारंभ होने का समय। मोटे तौर पर सूर्योदय सुबह 6 बजे और सूर्यास्त शाम 6 बजे माना जाता है। इस गणना के अनुसार सुबह 6 से 9 पहला प्रहर, 9 से 12 दूसरा प्रहर, 12 से 3 तीसरा प्रहर और 3 से सायं 6 तक चौथा प्रहर। इसी तरह रात्रि में भी चार प्रहर होते हैं। इनमें भी दिन के प्रहरों का अधिक महत्व है। इस तरह ठीक 9, 12, 3 और 6 बजे के समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। एक-दो मिनट बाद कार्य किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि संधिकाल में अनिष्ट शक्तियां प्रबल हो जाती हैं। इसलिए इन समयों में यात्रा करना भी निषिद्ध माना गया है। इसका दूसरा कारण यह है कि जिस प्रकार दो ऋतुओं, दो मौसमों के संधिकाल में प्रकृति विचलित हो जाती है ठीक उसी प्रकार दो प्रहरों के संधिकाल में हमारा मन, मस्तिष्क भी कुछ अनबैलेंस हो जाता है। इसलिए उस समय लिया गया निर्णय फलीभूत नहीं होता। 

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अंक शास्त्र के अनुसार जानिए सफल होने के सूत्र

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

अंक ज्योतिष में प्रत्येक अंक का एक प्रतिनिधि ग्रह माना गया है, जिसका संबंधित अंक वाले व्यक्ति के संपूर्ण जीवन पर प्रभाव रहता है। जैसे अंक 1 का प्रतिनिधि ग्रह सूर्य है। इसलिए उस व्यक्ति पर सूर्य का पूर्ण प्रभाव रहेगा। उसके मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, धन का आगमन सबकुछ सूर्य से संचालित होता है। इसी तरह अन्य अंक वालों को भी उस अंक के प्रतिनिधि ग्रह की कृपा प्राप्त होती। वैदिक ज्योतिष की तरह अंक शास्त्र में भी प्रत्येक अंक वाले व्यक्ति की सफलता के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। यदि अपने अंक के अनुसार उपाय करेंगे तो निश्चित रूप से प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी।


इसके लिए सबसे पहले आपको अपना लाइफ पाथ नंबर पता होना चाहिए। लाइफ पाथ नंबर निकालने के लिए व्यक्ति को अपनी संपूर्ण जन्म तारीख का जोड़ करना होता है। जैसे किसी व्यक्ति की जन्म तारीख 11. सितंबर. 1976 है, तो इन सभी अंकों का जोड़ कर लें। तारीख का जोड़ 2, महीने का जोड़ 9, वर्ष का जोड़ 23 यानी 5, अब इन सभी का जोड़ कर लें तो अंक 7 आएगा। यानी उस व्यक्ति का लाइफ पाथ नंबर हुआ 7.

किस अंक वाले क्या करें
अंक 1 : यदि लाइफ पाथ नंबर 1 आया है तो इसका प्रतिनिधि ग्रह सूर्य है। इस अंक वाले व्यक्ति नेतृत्वकर्ता होते हैं। इन लोगों को जीवन में सफल होने के लिए अपने साथ सूर्य यंत्र रखना चाहिए। सोने का कोई आभूषण अंगूठी या कड़ा धारण करके रखें। इन्हें अपने घर की पूर्वी दिशा में सुनहरी क्रिस्टल बॉल रखना चाहिए।

अंक 2 : लाइफ पाथ नंबर 2 का प्रतिनिधि ग्रह है चंद्र। इन लोगों को यदि जीवन में सफल होना है। ऊंचाइयां छूना है तो कभी भी किसी का अपमान न करें। इन्हें चांदी का चंद्रमा बनवाकर अपने गले में धारण करना चाहिए। संभव हो तो चांदी के गिलास में प्रतिदिन पानी पीएं। शाम के समय किसी को पैसा उधार भूलकर भी न दें।

अंक 3 : लाइफ पाथ नंबर 3 का प्रतिनिधि ग्रह है बृहस्पति। अंक 3 वालों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तभी सफलता मिलेगी जब ये बृहस्पति को प्रसन्न् रखेंगे। इसके लिए इन्हें सोना धारण करके रखना है। सोना नहीं पहन सकते तो पीतल का कड़ा दाहिने हाथ में पहनें। प्रत्येक गुरुवार को दूध में हल्दी डालकर पीएं।

अंक 4 : लाइफ पाथ नंबर 4 का प्रतिनिधि ग्रह है राहु। इस अंक वाले व्यक्तियों के कार्य में अक्सर रूकावटें आती हैं। उसे दूर करने के लिए अष्टधातु की अंगूठी पहनकर रखें। घर के दक्षिणी हिस्से में सफेद रंग का बल्ब जरूर लगाएं। घर में तुलसी का पौधा और दूर्वा लगाकर हर दिन उसे जल से सिंचित करें।

अंक 5 : लाइफ पाथ नंबर 5 का प्रतिनिधि ग्रह है बुध। इस अंक वाले ज्यादातर लोग लिखने-पढ़ने, बौद्धिक कार्यों से जुड़े रहते हैं। इन्हें जीवन में शिखर छूना है तो बुध को प्रसन्न् रखना होगा। इसके लिए हरा पेरिडॉट सोने की अंगूठी में हमेशा पहनें। बुधवार के दिन हरे रंग का कोई कपड़ा जरूर पहनें।

अंक 6 : लाइफ पाथ नंबर 6 का प्रतिनिधि ग्रह है शुक्र। यदि शुक्र खराब है तो इनका पारिवारिक जीवन कष्टप्रद रहता है। दोस्तों से इनकी नहीं बनती। रिश्ते छूट जाते हैं। इन सभी परेशानियों से बचने के लिए इन्हें सिल्वर रिंग अपने अंगूठे में पहनना चाहिए। घर के उत्तरी भाग में मनी प्लांट लगाएं।

अंक 7 : लाइफ पाथ नंबर 7 का प्रतिनिधि ग्रह है केतु। इस अंक वालों को जीवन में सफलता पाने के लिए काले पत्थर से बनी गणेशजी की प्रतिमा हमेशा अपने घर या दुकान, ऑफिस में रखना चाहिए। घर के गमले में तुलसी के साथ शमी का पौधा जरूर लगाकर रखें।

अंक 8 : लाइफ पाथ नंबर 8 का प्रतिनिधि ग्रह है शनि। जब-जब शनि कमजोर होता है, इस अंक वालों के जीवन में कई तरह के कष्ट आते हैं। वाहन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इन सबसे बचने के लिए शनि यंत्र घर में रखें। लाल चंदन की माला गले में धारण करके रखें।

अंक 9 : लाइफ पाथ नंबर 9 का प्रतिनधि ग्रह है मंगल। इस अंक वालों को सफल होना है तो लाल मूंगे के बने गणेशजी का पेंडेंट गले में धारण करें। लाल मूंगे के गणेशजी की प्रतिमा अपने घर के ईशान, पूर्व या उत्तर में रखें। इससे समस्त प्रकार के सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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Tuesday, 17 April 2018

शिव के पास है हर समस्या का समाधान

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

व्यक्ति के जीवन में जब कोई समस्या आने लगती है तो वह देवी-देवताओं की पूजा-पाठ करने लगता है, मंदिर जाने लगता है, जप-तप-हवन, दान आदि अनेक उपाय करने लगता है ताकि समस्याओं का अंत हो और उसका जीवन शांतिपूर्ण व्यतीत हो सके। परेशानी के समय व्यक्ति अनेक ज्योतिषियों के पास भी जाता है। यदि सही गणित करने वाला ज्योतिषी मिल गया तो उसकी परेशानियों का निश्चित रूप से अंत हो जाएगा, लेकिन यदि किसी गलत व्यक्ति के हत्थे चढ़ जाने पर उसका केवल वक्त और पैसा ही बर्बाद होगा।


यदि आपके जीवन में भी किसी तरह की कोई परेशानी चल रही है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है, भगवान शिव से जुड़े कुछ उपाय करके खुद ही अपने ग्रहों को अनुकूल बनाया जा सकता है। इसके लिए बस आवश्यकता होगी आपकी सच्ची श्रद्धा और विश्वास की। भगवान शिव समस्त तंत्र-मंत्र और ज्योतिष के जनक हैं। इसलिए ग्रहों को अनुकूल करने के लिए उनसे जुड़े उपाय किए जाना आवश्यक हो जाता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है शिवजी को अर्पित की जाने वाली वस्तुएं। भगवान शिव ने शिवमहापुराण में स्वयं को प्रसन्न् करने वाली वस्तुओं के बारे में बताया है। 

आइए जानते हैं कौन-सी समस्या के लिए कौन-से उपाय किए जा सकते हैं :

  • शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर दही अर्पित करने से जीवन में खुशी, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है। वाणी में मधुरता आती है। समाज में लोकप्रियता बढ़ती है।
  • शिवलिंग पर घी अर्पित करने से तेज की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर शकर चढ़ाने से सुख- समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर इत्र अर्पित करने से आध्यात्मिक उन्न्ति होती है।
  • शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से धन धान्य में वृद्धि होती है। जीवन में भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से समाज में यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर केशर अर्पित करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है। विवाह में आने वाली समस्त अड़चनें दूर होती है। मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है। विवाह के योग शीघ्र बनते हैं।
  • शिवलिंग पर आंवला या आंवले का रस चढ़ाने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है।
  • शिवलिंग पर गन्न्े का रस चढ़ाने से समस्त पारिवारिक सुखों की प्राप्ति होती है। परिवार के सदस्यों में प्रेम बना रहता है।
  • शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है। संतान आज्ञाकारी होती है।
  • शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों और समस्त रोगों का नाश होता है।
  • शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
  • भगवान शिव को प्रतिदिन बेलपत्र अर्पित करने से समस्त संकट दूर रहते हैं।

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अंगूठे में पहनें चांदी का छल्ला, चमक उठेंगे भाग्य के सितारे

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह का संबंध भौतिक सुख-सुविधाओं, भोग-विलासपूर्ण जीवन, ऐशो-आराम, प्रेम, यौन सुख और लग्जरी लाइफ से होता है। जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है, उसे ये सब सुख आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जिसकी कुंडली में शुक्र खराब अवस्था में हो वह इन सुखों से वंचित रहता है। बात यदि हस्तरेखा शास्त्र की करें तो इसमें प्रत्येक अंगुली और अंगूठा किसी न किसी ग्रह से जुड़ा हुआ है। इसमें अंगूठा शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है। अंगूठे के नीचे का पूरा भाग शुक्र पर्वत कहलाता है। इसलिए ग्रह विशेष की अनुकूलता पाने के लिए उससे संबंधित रत्न की अंगूठी उससे जुड़ी अंगुली में धारण की जाती है। यहां अभी हम केवल शुक्र ग्रह की बात कर रहे हैं, क्योंकि शुक्र यदि ठीक है तो व्यक्ति को जीवन में किसी वस्तु का अभाव नहीं रहेगा। 


हस्तरेखा शास्त्र में अंगूठे को शुक्र से संबंधित माना गया है। इसका प्रभाव व्यक्ति के भौतिक जीवन पर पूरी तरह दिखाई देता है। इसलिए अंगूठे से जुड़े ज्योतिष उपाय आसानी से समस्त प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है शुक्र का अच्छा या बुरा फल बहुत हद तक कुंडली में इसके मित्र और शत्रु ग्रहों की स्थितियों पर निर्भर करता है। शनि (धन से जुड़ा), बुध (बौद्धिक क्षमता, छठी इंद्रीय पर प्रभाव) और राहु (रोग-व्याधि या स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार) इसके मित्र ग्रह हैं। अगर ये तीनों खराब स्थिति में हैं, तो शुक्र बुरा फल दे सकता है तथा व्यक्ति को धन, बुद्धि और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां आती रहती हैं। इनके अलावा मंगल और बृहस्पति की स्थिति भी शुक्र के अच्छे और बुरे प्रभावों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। शुक्र यदि कुंडली में नीच का है तो बुरे प्रभाव देता है और अति उच्च का है तो व्यक्ति को व्याभिचार बना सकता है। शुक्र का प्रभाव निजी जीवन और रिश्तों पर भी पड़ता है। अगर शुक्र खराब हो तो आपके पारिवारिक जीवन में हमेशा कोई ना कोई परेशानी बनी रहेगी। अगर महसूस हो कि आपकी लव लाइफ या विवाहित जीवन खराब चल रहा है, तो समझिए आपका शुक्र खराब है।

यह है शुक्र को अनुकूल करने का उपाय
शुक्र ग्रह की पसंदीदा धातु चांदी और प्लेटिनम है। शुक्र की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए ज्योतिषीय उपचारों में चांदी या प्लेटिनम का छल्ला पहनना प्रमुख है। हाथ में शुक्र से संबंधित अंगूठा होता है, इसलिए चांदी या प्लेटिनम से बना छल्ला अंगूठे में धारण करें इससे शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव समाप्त होंगे। शुक्र नीच स्थिति में है और आपको बुरी तरह प्रभावित कर रहा हो, या उच्च स्थिति में, ये धातुएं केवल इसके शुभ फलों को ही आप तक आने देती हैं और शुक्र के कारण आपके जीवन में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को आपसे दूर रखती है। इसलिए जब भी लगे जीवन में बड़ी परेशानियां आने लगी हैं तो चांदी या प्लेटिनम का छल्ला शुक्र के मंत्र से अभिमंत्रित करके जरूर धारण करें।

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Sunday, 15 April 2018

साहसी, निडर और खिलाड़ी बनाता है रूचक योग

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

वैदिक ज्योतिष में पंच महापुरुष योग का वर्णन मिलता है। ये पंच महापुरुष योग हैं हंस योग, मालव्य योग, भद्र योग, शश योग और रूचक योग। ये सभी राज योगों की श्रेणी में आते हैं। जिस जातक की कुंडली में इनमें से एक भी योग होता है वे अपने जीवन में श्ाीर्ष तक पहुंचते हैं। इन पंच महापुरुष योग में भी रूचक योग सर्वाधिक चर्चित योग है क्योंकि इसमें जो व्यक्ति जन्म लेता है वह अपने साहस, बल, पराक्रम, निर्णय क्षमता और शारीरिक मजबूती के बल पर दुनिया में चर्चित होता है। 


वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न से अथवा चंद्र से केंद्र के घरों में स्थित हो, यानी मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न अथवा चंद्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें स्थान में मेष, वृश्चिक या मकर राशि में स्थित हो तो ऐसी कुंडली में रूचक योग का निर्माण होता है, जिसका शुभ प्रभाव जातक को शारीरिक बल तथा स्वास्थ्य, पराक्रम, साहस, प्रबल मानसिक क्षमता, समयानुसार उचित तथा तीव्र निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इस योग वाला जातक पुलिस, सेना, खेल प्रतिस्पर्धाएं जैसे क्रिकेट, फुटबाल, टेनिस, कुश्ती आदि में सफलता अर्जित करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि हासिल करता है। यह योग यदि किसी स्त्री की कुंडली में हो तो उसमें भी पुरुषों जैसे गुण पाए जाते हैं और वह पुरुषों की प्रधानता वाले क्षेत्रों जैसे कुश्ती आदि में ख्यात होती है।

रूचक योग के निर्माण में यह बात अत्यंत आवश्यक है कि मंगल का शुभ होना जरूरी है। रूचक योग एक अति शुभ तथा दुर्लभ योग है तथा इसके द्वारा मिलने वाले शुभ फल इस योग वाले प्रत्येक व्यक्ति में एक समान दिखाई नहीं देते। कुंडली में यदि मंगल अशुभ है तो रूचक योग के कारण जातक को गंभीर परिणाम भी भुगतना पड़ सकते हैं। कुंडली के जिन चार घरों में शुभ मंगल के किसी राशि विशेष में स्थित होने से रूचक योग बनता है, उनमें से तीन घरों 1, 4 तथा 7 में अशुभ मंगल के स्थित होने से मांगलिक दोष भी बनता है, जो अपनी स्थिति के आधार पर जातक को विभिन्न् प्रकार के अशुभ फल दे सकता है। इस प्रकार किसी कुंडली में रूचक योग बनने अथवा मांगलिक दोष बनने के बीच का अंतर मुख्यतया कुंडली में मंगल का शुभ अथवा अशुभ होना ही होता है।

शुभ रूचक योग के लक्षण
जिस जातक की जन्म कुंडली में शुभ मंगल के कारण रूचक योग बन रहा हो उनमें कुछ विशेष लक्षण जन्म से पाए जाते हैं। जैसे शुभ रूचक योग वाले जातक जन्म से ही साहसी होते हैं। उन्हें किसी भी चीज से डर नहीं लगता। जन्म से वे परिजनों, मित्रों के बीच लोकप्रिय और चर्चित होन लग जाते हैं। शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ, ऊंची कद-काठी और श्याम वर्ण के होते हैं। ऐसे जातकों का रूझान बचपन से किसी खेल के प्रति रहता है। वे एक बार जो ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।

अशुभ रूचक योग के लक्षण
जन्म कुंडली में यदि मंगल खराब स्थिति में है और फिर भी रूचक योग बन रहा है तो बालक बचपन से मानसिक रूप से अस्थिर होता है। दुबले-पतले शरीर वाला, बात-बात में डर जाने वाला होता है। ऐसा जातक हमेशा अनिर्णय की स्थिति में रहता है। कोई भी निर्णय लेने में उसे लंबा वक्त लगता है। बार-बार बीमार पड़ता है। ऐसा व्यक्ति स्पोर्ट्स के प्रति उदासीन होता है। पढ़ाई लिखाई में भी औसत रहता है। 

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अक्षय तृतीया के दिन लगाएं ये पौधे, दूर होंगे संकट

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हिंदू धर्म में प्रकृति को देवता माना गया है और पेड़-पौधों को पूजनीय। इसीलिए प्रत्येक ग्रह और नक्षत्र के साथ एक-एक वृक्ष को जोड़ा गया है। संबंधित वृक्ष या पौधे की पूजा करने से नवग्रहों की शांति की जा सकती है। इन वृक्षों-पौधों की सेवा करने और उन्हें किसी विशेष दिन लगाने से समस्त ग्रह दोषों से मुक्ति पाकर जीवन को सुगम बनाया जा सकता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में वर्ष के सबसे पूजनीय और त्वरित फल देने वाले दिनों में अक्षय तृतीया का दिन स्वयंसिद्ध माना गया है। इस दिन धन-संपदा की प्राप्ति के लिए अनेक उपाय किए जाते हैं। उनमें से एक उपाय है पौधों का रोपण करना।


अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को है। यदि आपके जीवन में भी किसी तरह की कठिनाई है, आर्थिक संकट बना हुआ है, शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार चल रहे हैं, आय के पर्याप्त साधन नहीं है तो अक्षय तृतीया के दिन अपनी समस्याओं के निवारण के लिए पौधों का रोपण करें और जीवन में खुशियों का समावेश करें : 

पीपल का पौधा
यदि आपके जीवन में स्थायी संपत्ति का अभाव है, आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में बाधा आ रही है तो अक्षय तृतीया के दिन शुद्ध जल से स्नान करने के बाद अपने घर में गमले में या किसी बगीचे में पीपल का पौधा रोपें। इसमें नियमित स्नान के बाद जल चढ़ाएं। प्रत्येक अमावस्या के दिन इसकी जड़ में कच्चा दूध, पानी और मिश्री अर्पित करें। इससे आर्थिक समस्या दूर होने लगेगी। विवाह में आ रही बाधा दूर होगी।

शमी का पौधा
अक्षय तृतीया के दिन शमी के पौधे का रोपण करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसे लगाने से अनंत गुना शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शमी के पौधे से शनि ग्रह के दोष दूर होते हैं। यदि जन्म कुंडली में पितृदोष या कालसर्प दोष बना हुआ है तो शमी का पौधा लगाने से ये दोष तुरंत दूर हो जाते हैं। जिन लोगों को शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैया चल रही हो वे भी शमी का पौधा अवश्य लगाएं।

तुलसी का पौधा
तुलसी का पौधा वैसे तो अधिकांश हिंदू घरों में होता ही है। यदि नहीं है तो अक्षय तृतीया का दिन तुलसी लगाने के लिए सबसे उत्तम दिन है। इस दिन तुलसी का पौधा लगाने से पारिवारिक जीवन में प्रेम बना रहता है। तनाव मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तुलसी के पौधे से अक्षय संपदा की प्राप्ति होती है। साथ ही नवग्रहों की पीड़ा दूर होती है। तुलसी का पौधा लगाने के बाद नियमित जल से इसका सिंचन करें और शाम के समय इसके समीप दीपक जरूर लगाएं।

बेल पत्र का पौधा
बेल पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अक्षय तृतीया के दिन इसके पौधे का रोपण करके नियमित इसका सिंचन करने से शिव प्रसन्न् होते हैं। जिस घर में बेल पत्र के पौधे की सेवा की जाती है वहां कभी किसी को बीमारियां नहीं होती। मृत्यु का भय टल जाता है। जहरीले जीव-जंतु उस घर से दूर रहते हैं। शिव की कृपा से घर में किसी चीज की कमी नहीं होती।

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Wednesday, 11 April 2018

सूर्य 14 अप्रैल 2018 से करेंगे मेष राशि में प्रवेश, जानिए किस राशि को क्या मिलने वाला है

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

ग्रहों का राजा सूर्य हर माह अपनी राशि बदलता है। 14 अप्रैल को सूर्य का गोचर मेष राशि में होने जा रहा है। इस दिन मीन मलमास भी समाप्त होगा। वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा, पिता, पूर्वज, उच्च सरकारी नौकरी, पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान का कारक ग्रह कहा जाता है। सूर्य के शुभ प्रभाव से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उच्च सफलता हासिल होती है, जबकि खराब स्थिति होने से मान-सम्मान में कमी, पिता को कष्ट और नेत्र पीड़ा मिलती है। 

14 अप्रैल 2018 शनिवार को सूर्य प्रात: 8.28 बजे मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेगा। यह 15 मई 2018 तक इसी राशि में स्थित रहेगा। सूर्य के इस राशि परिवर्तन से आगामी एक माह तक प्रत्येक राशि पर क्या होगा असर, आइए जानते हैं :

मेष : राशि चक्र की इस प्रथम राशि में सूर्य का गोचर हो रहा है। इसलिए इस राशि वालों के मन, आत्मा और शरीर पर गहरा असर पड़ने वाला है। आगामी एक माह के दौरान इस राशि वालों को सरकारी कामकाज में लाभ मिलने की प्रबल संभावना बनेगी। मंगल की राशि में सूर्य के प्रवेश से स्वभाव में उग्रता, गुस्सा अधिक आने जैसी स्थिति भी बनेगी। नौकरी में पद-प्रमोशन मिलेगा। बिजनेस में सफलतापूर्वक विस्तार करेंगे। अपने बौद्धिक कौशल के दम पर कई कार्यों में आपकी जीत होगी। सूर्य का गोचर पिता के लिए भी अनुकूल साबित हो सकता है।
उपाय : मंगलवार के दिन गरीबों को मिठाई और उनके उपचार की दवाओं का वितरण करें।

वृषभ : वृषभ राशि के लिए सूर्य का गोचर बारहवें भाव में होगा। यह व्यय स्थान है। इस राशि वालों का कॅरियर गति पकड़ने वाला है। विदेश जाने के योग बन रहे हैं। स्टूडेंट्स उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा सकते हैं। हालांकि इन सब कार्यों पर खर्च अधिक होगा, क्योंकि बारहवां भाव व्यय भाव है। स्वास्थ्य की दृष्टि से सूर्य का यह गोचर कुछ परेशानीभरा हो सकता है। सिरदर्द के साथ शरीर के अनेक हिस्सों में दर्द, फीवर, जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इस दौरान शत्रुओं को परास्त करने में आप कामयाब होंगे। भूमि, भवन, संपत्ति की खरीदी-बिक्री कर सकते हैं।
उपाय : शुक्रवार के दिन भगवान शिव को सफेद आंकड़े के 108 पुष्प अर्पित करें।

मिथुन : मिथुन राशि के लिए सूर्य का गोचर 11वें भाव में होगा। यह आय स्थान है। इसलिए इस राशि के लोगों की आय में अचानक वृद्धि होने के संकेत हैं। यदि आप नौकरी में हैं तो वेतनवृद्धि मिलेगी। बिजनेस में हैं तो लाभपूर्ण स्थिति में आ जाएंगे। आर्ट, कल्चर से जुड़े इस राशि के लोगों की ख्याति चारों ओर फैलेगी। लंबे समय से अटके कार्यों को गति मिलेगी। दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ेगा। प्रेमी-प्रेमिकाओं का वक्त में प्रेमालाप में बीतेगा। इस राशि की कन्याओं कोउपहार, नवीन वस्त्र-आभूषण की प्राप्ति होगी।
उपाय : सूर्योदय के समय प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं।

कर्क : इस राशि के लिए सूर्य का गोचर 10वें भाव में होगा। यह कर्म स्थान यानी कार्य-व्यवसाय का स्थान है। इस राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर लाभप्रद होगा। कार्यक्षेत्र में आपका कद बढ़ेगा। कार्य क्षमता में वृद्धि होने से आप अपने उच्चाधिकारियों को इम्प्रैस करने में कामयाब होंगे। इससे आपके स्वभाव में घमंड आ सकता है। इस राशि के लोगों के सरकारी कामकाज में कोई रूकावट नहीं आएगी। एक बात का ध्यान रखें कि इस राशि के लोगों को स्वयं और अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।
उपाय : सूर्यास्त के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें।

सिंह : सिंह राशि के लिए सूर्य का गोचर नौवें भाव में होगा। इससे पारिवारिक और सामाजिक स्थिति में सम्मान बढ़ेगा। पुराने समय से रूके हुए कार्यों में तेजी आएगी। किस्मत का साथ मिलेगा और व्यापारी तरक्की की नई राह पर चल पड़ेंगे। इस एक माह के दौरान सिंह राशि वालों को लंबी दूरी की यात्राएं करना पड़ेंगी। धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। पारिवारिक स्थिति में खुशहाली आएगी, लेकिन परिवार के बुजुर्ग लोगों से आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है।
उपाय : प्रतिदिन आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ कठिनाइयों से बचाएगा।

कन्या : सूर्य आपकी राशि के आठवें भाव में गोचर करेगा। आठवां सूर्य परेशानीभरा साबित हो सकता है। कन्या राशि के जातकों को आगामी एक माह में शारीरिक बीमारियां परेशान कर सकती हैं।  खर्चों में अचानक वृद्धि होगी। यात्रा पर जाना पड़ सकता है। अपने व्यापार विस्तार या धन संबंधी बातों की चर्चा सार्वजनिक रूप से न करें। जीवनसाथी की ओर से धन-संपत्ति प्राप्त होने के योग बन रहे हैं। व्यर्थ के वाद-विवादों से बचने का प्रयास करें। परिवार के साथ मिलकर चलेंगे तो फायदे में रहेंगे।
उपाय : शिव परिवार की पूजा करने से संकटों से बचे रहेंगे।

तुला : तुला राशि के लिए सूर्य का गोचर सातवें भाव में होगा। यह विवाह का स्थान है। तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर वैवाहिक जीवन के लिए लाभप्रद रहेगा। दांपत्य जीवन में चला आ रहा मनमुटाव दूर होगा। अविवाहितों के विवाह के योग बनेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जीवनसाथी की मदद से आर्थिक लाभ होगा। तुला राशि के जातकों को आगामी एक माह में कोई नया रिश्ता मिल सकता है। प्रेम संबंध बनेंगे। इस राशि के नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अच्छा बीतेगा।
उपाय : गाय को हरा चारा खिलाएं। पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करें।

वृश्चिक : सूर्य वृश्चिक राशि के लिए छठे भाव में गोचर करने वाला है। इससे इस राशि वालों के साहस की वृद्धि होगी। कठिन से कठिन चुनौती से निपटने की हिम्मत मिलेगी। विरोधियों और शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकेंगे। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में प्रमोश्ान, वेतनवृद्धि मिलेगी। हालांकि स्वास्थ्य के लिहाज से ध्यान रखने वाला समय रहेगा। बीमारियों पर खर्च, परिवार में बेवजह के विवाद, संतान पक्ष की ओर से कोई बुरी खबर मिल सकती है।
उपाय : प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें। लाल कपड़ों का दान करें।

धनु : इस राशि के लिए सूर्य का गोचर पांचवें भाव में होगा। इस राशि वालों की आय में वृद्धि होगी। स्टूडेंट्स अपनी मेहनत से अच्छा रिजल्ट लाने में कामयाब होंगे। प्रेम संबंध में सावधानी से चलने की जरूरत होगी। व्यर्थ की बहस में उलझेंगे तो प्रेम संबंध टूट सकता है। इस राशि के जो लोग नौकरी में परिवर्तन करना चाहते हैं वे बेशक कर सकते हैं। आर्थिक जरूरतों में भाई-बहन आपकी मदद के लिए आगे आएंगे। धन-संपदा में वृद्धि के संकेत हैं। नया वाहन खरीदने के योग बनेंगे।
उपाय : प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ करें। एक दिन छोड़कर गरीबों को दूध का दान करें।

मकर : मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर चतुर्थ भाव यानी सुख स्थान में होगा। चूंकि मकर शनि की राशि है और सूर्य इसके विरोधी हैं इसलिए पिता या परिजनों के साथ मतभेद बढ़ने के संकेत हैं। आपकी माता की सेहत भी बिगड़ सकती है। बात यदि नौकरीपेशा की करें तो कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहेगा। इसका लाभ वेतनवृद्धि और पद-प्रमोशन के रूप में मिलेगा। अचानक कोई खुशखबरी मिलने के संकेत हैं। संपत्ति खरीदेंगे।
उपाय : प्रत्येक शनिवार को शनिदेव को सरसो का तेल चढ़ाएं।

कुंभ : सूर्य इस राशि के लिए तीसरे भाव में गोचर करेगा। इससे आप ऊर्जावान बने रहेंगे। जीवनसाथी की मदद से आर्थिक लाभ मिल सकता है। आप अपने व्यवहार और कुशल बातचीत के जरिए दूसरों को प्रभावित करने में सफल होंगे। इस दौरान आपकी निणर््ाय क्षमता मजबूत रहेगी। अपने कार्य के प्रति इमानदार और लक्ष्य के प्रति संकल्पबद्ध रहेंगे। गोचर के दौरान इस राशि वाले किसी यात्रा पर जा सकते हैं। पिता की सेहत में थोड़ी गिरावट आ सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
उपाय : एक माह तक प्रतिदिन पीपल के पेड़ में कच्चा दूध शकर डालकर अर्पित करें।

मीन : मीन राशि के लिए सूर्य का गोचर द्वितीय स्थान, धन भाव में होगा। इससे कई बार अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन व्यवस्था हो जाएगा। व्यापारी वर्ग कार्य विस्तार करेंगे लेकिन प्रगति की रफ्तार कुछ धीती रहेगी। इस दौरान अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा, वरना मुसीबत में पड़ जाएंगे। स्वास्थ्य को लेकर भी किसी परेशानी से गुजरना पड़ सकता है। सरकारी कामकाज में रूकावट आएगी, लेकिन काम हो जाएगा। कोशिश करें इस एक माह में कोई वाहन, संपत्ति न खरीदें।
उपाय : प्रत्येक गुरुवार को चने की दाल गरीबों को दान करें।

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अपनी राशि से जानिए... कौन सा काम रहेगा फलदायी

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

आजकल की सबसे बड़ी समस्या है अपने लिए सही नौकरी या बिजनेस तलाशना। कई युवा नौकरी की तलाश में यहां-वहां भटकते रहते हैं, कई तरह के बिजनेस भी करते हैं, लेकिन किसी में भी सफलता नहीं मिलती। कोई काम थोड़े दिन ठीक चलता है फिर अचानक उसमें नुकसान होने लगता है। जबकि किसी-किसी व्यक्ति को पहले प्रयास में ही ऐसा काम हाथ लग जाता है मानो उसकी किस्मत खुल गई हो। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों होता है? इसका जवाब ज्योतिष शास्त्र में मिलता है।


दरअसल आप जीवन में कौन-सी नौकरी या कौन-सा बिजनेस करेंगे, यह सब आपकी जन्म कुंडली में मौजूद ग्रहों पर निर्भर करता है। जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है वही आपकी जन्म राशि होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक राशि का अपना एक स्वभाव और गुण होता है। उसका जीवन के प्रत्येक भाग पर गहरा असर होता है। बात यदि कार्य-व्यवसाय की करें तो जन्म राशि देखकर मोटे तौर पर अनुमान लगाया जा सकता है कि व्यक्ति को किस धंधे में या किस तरह की नौकरी में सफलता मिलेगी। 

आइए आप स्वयं अपनी राशि देखकर यह पता कर लीजिए : 

मेष : मेष राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के लोग पुलिस अथवा सेना की नौकरी, इंजीनियरिंग, फौजदारी का वकील, सर्जन, ड्राइविंग, घड़ी सुधारने का कार्य, रेडियो व टीवी मैकेनिक, विद्युत सामान का बिजनेस, कंप्यूटर, जौहरी, अग्नि संबंधी कार्य, मैकेनिक, ईंटों का भट्टा, किसी फैक्ट्री में कार्य, भवन निर्माण सामग्री, धातु व खनिज संबंधी कार्य, सेलून, टेलरिंग बेकरी का कार्य, फायरमैन, कारपेंटर जैसे कामों को सफलतापूर्वक कर सकते हैं।

वृषभ : इस राशि के स्वामी शुक्र हैं। इसलिए शुक्र से संबंधित कार्यों में लाभ मिलता है। सौंदर्य प्रसाधन, हीरा उद्योग, शेयर ब्रोकर, बैंक कर्मचारी, नर्सरी, खेती, संगीत, नाटक, फिल्म या टीवी कलाकार, पेंटर, केमिस्ट, ड्रेस डिजाइनर, कृषि अथवा राजस्व विभाग की नौकरी, महिला विभाग, सेल्स टैक्स या आयकर विभाग की नौकरी, ब्याज से धन कमाने का कार्य, सजावट तथा विलासिता की वस्तुओं का निर्माण अथवा व्यापार, चित्रकारी, कशीदाकारी, कलात्मक वस्तुओं से जुड़ा बिजनेस, फैशन, कीमती पत्थरों या धातु का व्यापार, होटल, आइसक्रीम, बर्फ संबंधी कारोबार में सफलता।

मिथुन : राशि स्वामी बुध से जुड़ा कार्य लाभ देता है। पुस्तकालय अध्यक्ष, लेखाकार, इंजीनियर, टेलिफोन आपरेटर, सेल्समैन, शेयर ब्रोकर, दलाल, संपादक, संवाददाता, अध्यापक, शिक्षक, किसी संस्था का सचिव, साइकल की दुकान, अनुवादक, स्टेशनरी का बिजनेस, ज्योतिष, गणितज्ञ, लिपिक का कार्य, चार्टर्ड अकाउंटेंट, भाषा विशेषज्ञ, लेखक, पत्रकार, प्रतिलिपिक, विज्ञापन प्रबंधन, मैनेजर, दुभाषिया, बिक्री एजेंट आदि।

कर्क : राशि स्वामी चंद्र है। जड़ी-बूटियों का व्यापार, किराने की दुकान, फल-फूलों की नर्सरी, रेस्टोरेंट, चाय-काफी की दुकान, जल व कांच से संबंधित कार्य, मधुशाला, नाविक, डेयरी फार्म, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान आदि से संबंधित कार्य, श्ाहर का व्यापार, सुगंधित पदार्थ व कलात्मक वस्तुओं से जुड़ा कार्य, सजावट की वस्तुएं, अगरबत्ती, फोटोग्राफी, अभिनय, पुरातत्व इतिहासवेत्ता, संग्रहालय, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता या सामाजिक संस्थाओं में नौकरी, अस्पताल की नौकरी, जहाज की नौकरी, मौसम विभाग, जल विभाग या जलसेना की नौकरी, जनरल मर्चेंट।

सिंह : राशि स्वामी सूर्य के अनुसार किए जाने वाले कार्यों में सफलता मिलती है। पेट्रोलियम, भवन निर्माण, चिकित्सक, राजनेता, औषधि निर्माण एवं व्यापार, कृषि से उत्पादित वस्तुएं, स्टॉक एक्सचेंज, कपड़ा, रूई, कागज, स्टेशनरी आदि से संबंधित व्यवसाय, जमीन से प्राप्त पदार्थ, शासक, प्रसाशक, अधिकारी, वन अधिकारी, राजदूत, सेल्स मैनेजर, ऊन के गरम कपड़ों का व्यापार, फर्नीचर व लकड़ी का व्यापार, फल व मेवों का व्यापार, पायलट, पैतृक व्यवसाय से धन अर्जित करता है।

कन्या : इस राशि के स्वामी बुध हैं। अध्यापक, संस्था सचिव, रेडियो या टीवी का उद्घोषक, ज्योतिष, डाक सेवा, लिपिक, बैंकिंग, लेखा संबंधी कार्य, मैनेजर, बस ड्राइवर, अनुवादक, पुस्तकालय अध्यक्ष, कागज के व्यापारी, हस्तलेख और अंगुली के विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, अन्वेषक, संपादक, परीक्षक, कर अधिकारी, सेल्समैन, शोध कार्य पत्रकारिता आदि। 

तुला : राशि स्वामी शुक्र हैं। इस राशि के लोग न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, परामर्शदाता, फिल्म या टीवी से संबंधित कार्य, फोटोग्राफर, फर्नीचर का व्यवसाय, मूल्यवान वस्तुओं का विनिमय, धन का लेन-देन, नृत्य-संगीत या चित्रकला से संबंधित कार्य, साज-सज्जा, अध्यापक, बैंक क्लर्क, एजेंसी, दलाली, विलासिता की वस्तुएं, राजनेता, जनसंपर्क अधिकारी, फैशन मॉडलिंग, सामाजिक कार्यकर्ता, रेस्तरां का मालिक, चाय या काफी की दुकान, मूर्तिकार, कार्टूनिस्ट, फैशन डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट, डांसर बनते हैं।

वृश्चिक : राशि स्वामी मंगल के स्वभाव के अनुसार किए जाने वाले कार्यों में सफलता। केमिस्ट, चिकित्सक, वकील, इंजीनियर, भवन निर्माण, टेलीफोन व बिजली का सामान, रंग, सीमेंट, ज्योतिषी और तांत्रिक, जासूस, डेंटिस्ट, मैकेनिक, ठेकेदार, जीवन बीमा एजेंट, रेल या ट्रक कर्मचारी, पुलिस और सेना में नौकरी, टेलिफोन आपरेटर, समुद्री खाद्यान्नों के व्यापारी, गोता लगाकर मोती निकालने का काम, होटल या रेस्टोरेंट, खान-पान की वस्तुओं का व्यापार, चोरी या डकैती, शराब की फैक्ट्री, कलपुर्जों की दुकान या फैक्ट्री, लोहे या स्टील का कार्य, तंबाकू या सिगरेट का कार्य, सेलून, मिष्ठान की दुकान, फायर बिग्रेड की नौकरी।

धनु : बृहस्पति इस राशि के स्वामी हैं। बैंक की नौकरी, अध्यापन, किसी धार्मिक स्थान से जुड़ा कार्य, ऑडिट का कार्य, कंपनी सेक्रेटरी, ठेकेदार, सट्टा व्यापार, प्रकाशक, विज्ञापन से संबंधित कार्य, सेल्समैन, संपादक, शिक्षा विभाग में कार्य, लेखन, वकालत या कानून संबंधी कार्य, उपदेशक, न्यायाधीश, धर्म-सुधारक, कमीशन एजेंट, आयात-निर्यात का कार्य, प्रशासनिक अधिकारी, पशुओं से उत्पन्न् वस्तुओं का व्यापार, चमड़े या जूते का बिजनेस, घोड़ों के प्रशिक्षक, ब्याज का धंधा, स्टेशनरी विक्रेता।

मकर : राशि स्वामी शनि के स्वभाव के अनुसार मकर राशि के लोग नेवी की नौकरी, कस्टम विभाग का कार्य, बड़ा व्यापार या उच्च पदाधिकारी, समाजसेवी, चिकित्सक, नर्स, जेलर या जेल से संबंधित कार्य, संगीतकार, ट्रेवल एजेंट, पेट्रोल पंप, मछली का व्यापार, मैनेजमेंट, बीमा विभाग, ठेकेदारी, रेडीमेड वस्त्र, प्लास्टिक, खिलौना, बागवानी, खेती, पशुओं से उत्पन्न् वस्तुओं का व्यापार, वन अधिकारी, शिल्पकार, फैक्ट्री या मिल कारीगर से जुड़े कार्य कर सकते हैं।

कुंभ : इस राशि के स्वामी भी शनि हैं। शोध कार्य, शिक्षण कार्य, ज्योतिष, तांत्रिक, प्राकृतिक चिकित्सक, इंजीनियर या वैज्ञानिक, दार्शनिक, एक्स-रे कर्मचारी, चिकित्सकीय उपकरणों के विक्रेता, बिजली अथवा परमाणु शक्ति से संबंधित कार्य, कंप्यूटर, वायुयान, वैज्ञानिक, दूरदर्शन टैक्नोलॉजी, कानूनी सलाहकार, मशीनरी संबंधी कार्य, बीमा विभाग, भ्ावन निर्माण ठेकेदार, लोहा, तांबा, कोयला व ईधन के विक्रेता, चमड़े की वस्तुओं का व्यापार कर सकते हैं।

मीन : राशि स्वामी बृहस्पति हैं। लेखन, संपादन, अध्यापन कार्य, लिपिक, दलाली, मछली का व्यापार, कमीशन एजेंट, आयात-निर्यात संबंधी कार्य, खाद्य पदार्थ या मिष्ठान की दुकान, पशुओं से उत्पन्न् वस्तुओं का व्यापार, फिल्म निर्माण, सामाजिक कार्य, संग्रहालय या पुस्तकालय का कार्य, संगीतज्ञ, यात्रा एजेंट, पेट्रोल और तेल के व्यापारी, समुद्री उत्पादों के व्यापारी, मनोरंजन केंद्रों के मालिक, चित्रकार या अभिनेता, चिकित्सक, सर्जन, नर्स, जेलर और जेल के कर्मचारी, ज्योतिषी, पार्षद, वकील, प्रकाशक, रोकड़िया, किराना का व्यापारी, साहित्यकार बनते हैं।

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Tuesday, 10 April 2018

आयु रेखा पर बना तारा कम कर देता है उम्र

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

क्या आप जानते हैं आपकी हथेली में मौजूद एक छोटे से छोटे चिन्ह भी बड़ा महत्व रखता है। कोई भी चिन्ह भले ही वह छोटा ही क्यों न हो, उसके पीछे कई गहरे राज छुपे होते हैं। हस्तरेखा के जानकार इन चिन्हों का सही परीक्षण करके आपके भविष्य की परतें खोल सकते हैं। वर्ग, तारा या नक्षत्र, त्रिभुज जैसे कई चिन्ह होते हैं जो व्यक्ति  के भविष्य की सूचनाएं देते हैं। 


आज बात करते हैं हथेली में मौजूद तारा या नक्षत्र चिन्ह की। यह हथेली में जिस पर्वत, रेखा और स्थान पर होता है उसके अनुसार व्यक्ति  के जीवन में घटनाएं होती हैं।

1. तर्जनी अंगुली के नीचे गुरु पर्वत होता है। यदि गुरु पर्वत पर तारा बना है तो ऐसे व्यक्ति  को किसी भी क्षेत्र में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। सफलता उसके कदम चूमती है और धन, मान, पद, प्रतिष्ठा उसे सहज ही प्राप्त हो जाती है। उसके जीवन में सदा उन्न्ति होती रहती है। समाज में सम्मान पाता है और उसके जीवन में कोई कमी नहीं रहती है।

2. मध्यमा अंगुली के तल में होता है शनि पर्वत। शनि पर्वत पर तारा चिन्ह है तो ऐसा व्यक्ति  कम आयु में ही भाग्यवान बन जाता है। ऐसे व्यक्ति  एक बार जिस लक्ष्य की ओर चल पड़ते हैं, उसे समय से पहले पा लेते हैं। उनके मार्ग में कोई बाधा नहीं आती और वे जीवन में पूर्ण यश और सम्मान पाने में सफल होते हैं।

3. अनामिका अंगुली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत पर बना तारा या नक्षत्र का चिन्ह जीवन में अपार धन की सौगात लाता है। ऐसे व्यक्ति  के पास धन के भंडार भरे रहते हैं। भौतिक रूप से वह जीवन का हर सुख पाता है। शारीरिक और मानसिक रूप से भी वह पूरी तरह स्वस्थ और सुखी रहता है।

4. कनिष्ठिका अंगुली के नीचे स्थित बुध पर्वत पर यदि तारा बना हो, तो ऐसा व्यक्ति  सफल व्यापारी बनता है। ऐसे जातक योजनाएं बनाने में परम कुशल होते हैं और उनकी योजनाएं हमेशा शुभ फलीभूत होती हैं। ऐसे व्यक्ति  सफल कवि और साहित्यकार बनते भी पाए गए हैं।

5. अंगूठे के नीचे का भाग शुक्र पर्वत कहलाता है। शुक्र पर्वत पर तारे का चिन्ह व्यक्ति  को भोगी बनाता है। उसे अत्यंत सुंदर और स्वस्थ पत्नी मिलती है, इसके बाद भी उसके अनेक स्त्रियों के साथ संबंध रहते हैं।

6. यदि स्वास्थ्य रेखा पर तारे का चिन्ह हो तो व्यक्ति  का स्वास्थ्य हमेशा कमजोर बना रहता है। उसे जीवन भर कोई ना कोई बीमारी घेरे रहती है और उसकी मृत्यु भी अत्यंत दुखदायी परिस्थितियों में होती है।

7. आयु रेखा पर बना तारा चिन्ह अत्यंत अशुभ होता है। ऐसे जातक की मृत्यु उसके यौवनकाल में ही होती देखी गई है।

8. यदि मंगल रेखा पर तारे का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति   झगड़ालु प्रवृत्ति का होता है। उसकी हत्या होने का अंदेशा रहता है।

9. विवाह रेखा पर तारे का चिन्ह हो तो ऐसे जातक का विवाह देर से और ढेर सारी बाधाओं के बाद ही हो पाता है। इसके बावजूद वह विवाह का सुख नहीं उठा पाता और उसका पूरा गृहस्थ जीवन दुखमय ही रहता है।

10. तर्जनी उंगली पर बना नक्षत्र का चिन्ह हर प्रकार से शुभ माना गया है। यह जीवन में समस्त प्रकार की शुभता का संकेत देता है।

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इन चीजों की धूनी देने से दूर हो जाएगी सभी समस्याएं

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हिंदू पूजा पद्धति में पुष्प, इत्र, अगरबत्ती और धूप आदि सुगंधित द्रव्यों का बड़ा महत्व है। पूजा में इन चीजों का प्रयोग करने से न केवल आध्यात्मिक माहौल बनता है, बल्कि जिस स्थान पर पूजा हो रही होती है वहां सकारात्मक ऊर्जा भी भर जाती है। इन्हीं वस्तुओं में एक सबसे महत्वपूर्ण चीज है धूनी यानी धूप। सुगंधित धूप देने से मन को शांति और प्रसन्न्ता प्राप्त होती है। साथ ही इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है। यह धूप भी कई तरह की होती है। यह धूप गाय के कंडे को जलाकर उसमें डाली जाती है। आइये जानते हैं किसी वस्तु की धूप देने से क्या लाभ होता है। 


गुग्गुल की धूप : हमारी पूजा पद्धति में सदियों से गुग्गुल का प्रयोग होता रहा है। यदि आपके घर में लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं तो सप्ताह में कम से कम एक बार गुग्गुल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है। इसके साथ ही इससे मस्तिष्क संबंधी रोग भी दूर होते हैं।

लोबान की धूप : यदि आप लगातार किसी न किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं या आर्थिक संकट बना हुआ है तो लोबान को कंडे या अंगारे में रखकर शनिवार-रविवार के दिन जलाएं। लेकिन ध्यान रहे लोबान जलाने से परालौकिक शक्तियां आकर्षित होती हैं। इसलिए पहले किसी विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह ले लें।

कर्पूर और लौंग : हिंदू पूजा का प्रमुख हिस्सा है कर्पूर। कर्पूर के बिना आरती पूर्ण नहीं होती। हर दिन सुबह और शाम को घर में कर्पूर और लौंग जलाने से समस्त प्रकार के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं। इसकी आरती परिवार के सभी सदस्यों को लेना चाहिए। इस प्रयोग से आर्थिक संकट भी दूर हो जाता है।

पीली सरसो : पीली सरसो, गुग्गुल, लोबान और गाय के घी को मिलाकर सूर्यास्त के समय उपले (कंडे) जलाकर उस पर ये सारी सामग्री डाल दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी। 

गायत्री केसर : यदि परिवार में लगातार कोई न कोई सदस्य बीमार रहता हो। बीमारियों पर खर्च अधिक हो रहा हो तो जावित्री और गायत्री केसर को बारीक पीसकर उसमें गुग्गुल मिला लें। इस मिश्रण की धूनी रोज शाम के समय दें। ऐसा लगातार 21 दिनों तक करें। यदि आपके परिवार पर किसी ने कोई तंत्र प्रयोग कर रखा है तो इससे वह भी दूर हो जाएगा।

नीम के पत्ते : घर में सप्ताह में एक या दो बार नीम के पत्ते की धूनी जरूर जलाएं। इससे जहां एक और सभी तरह के जीवाणु नष्ट हो जाएंगे, वही वास्तुदोष भी समाप्त हो जाएगा।

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Monday, 9 April 2018

क्या आपके हाथ में भी बन रहा है चतुष्कोण?

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हस्तरेखा शास्त्र मूलत: रेखाओं और उनसे मिलकर बनी विभिन्न् आकृतियों का विश्लेषण करके भविष्य कथन करता है। इनमें कई तरह की आकृतियां बन सकती है। कुछ शुभ तो कुछ अशुभ होती है। आज जानते हैं हथेली में चतुष्कोण बनने का क्या अर्थ होता है। किन रेखाओं से मिलकर चतुष्कोण बने तो क्या कथन होता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर जिस किसी भी रेखा के साथ या पर्वत पर चतुष्कोण बनता है, उस रेखा या पर्वत से संबंधित शुभ परिणामों में वृद्धि होती है। इस तरह हथेली पर चतुष्कोण होना शुभ माना गया है। लेकिन हथेली पर एक स्थान ऐसा भी है जहां चतुष्कोण होना ठीक नहीं माना जाता और वह स्थान है शुक्र पर्वत।

हथेली पर चार रेखाओं से मिलकर बनने वाली चौकोर आकृति चतुष्कोण कहलाती है। यह आकृति टेढ़ी-मेढ़ी और अलग-अलग लंबाई-चौड़ाई वाली हो सकती है। यदि हथेली की कोई रेखा स्पष्ट और निर्दोष है तथा उस पर चतुष्कोण बना हुआ है तो यह उस रेखा से प्राप्त होने वाले शुभ परिणामों को बढ़ा देता है। यदि रेखा टूटी हुई है और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो उस टूटी रेखा के बुरे प्रभावों को कम कर देता है।

कहां-कैसा फल


  1. जीवन रेखा पर चतुष्कोण की उपस्थिति उम्र बढ़ाने वाली मानी गई है। यदि जीवन रेखा टूट रही हो और उस पर चतुष्कोण बना हो तो यह शारीरिक तकलीफों को कम कर देता है। 
  2. यदि हथेली पर कहीं नीले, काले या लाल बिंदु के निशान हों और उसके पास कहीं चतुष्कोण बन रहा हो तो यह अग्नि से व्यक्ति को रक्षा प्रदान करता है।
  3. यदि हथेली में विवाह रेखा सीधी न चलकर नीचे की ओर झुक रही हो या आकार में गोल हो रही हो। तो यह स्थिति जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं मानी गई है। विवाह रेखा में दोष हो और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो जीवनसाथी के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है। 
  4. हथेली में भाग्य रेखा टूटी हुई हो तो व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में असफलता सामना करना पड़ता है। लेकिन इस पर चतुष्कोण बन रहा हो तो भाग्य के रास्ते में आने वाली रूकावटें स्वत: दूर होती चली जाती हैं।
  5. मंगल पर्वत हथेली में दो जगह होता है। एक तो जीवन रेखा के ठीक नीचे अंगूठे के पास और दूसरा हृदय रेखा के ठीक नीचे मस्तिष्क रेखा के पास। मंगल पर्वत दबा हुआ तो व्यक्ति में साहस की कमी रहती है। वह दब्बू किस्म का हो जाता है। लेकिन यदि मंगल पर्वत पर चतुष्कोण बन रहा हो तो व्यक्ति कभी अपने शत्रुओं से हारता नहीं है।
  6. शनि पर्वत खराब हो तो व्यक्ति गलत संगत में पड़कर गलत कार्य करने लगता है। इस पर यदि चतुष्कोण बना है तो व्यक्ति बुरी संगत में नहीं पड़ता और यदि पड़ भी गया है तो शीघ्र ही उससे बाहर आ जाता है। ऐसा व्यक्ति आगे चलकर समाज हित के कई कार्य करता है।
  7. मस्तिष्क रेखा अधिक लंबी, जंजीरदार या कटी-फटी है तो व्यक्ति मानसिक रोगी होता है। यदि चतुष्कोण इस रेखा पर बना है तो व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। मानसिक रूप से वह काफी मजबूत होता है। 
  8. हृदय रेखा पर चतुष्कोण बनने से व्यक्ति में गजब का आत्मविश्वास होता है। हृदय रेखा खराब होने से हृदय रोग हो सकते हैं, लेकिन इस पर चतुष्कोण होने से हृदय रोगों से बचाव होता है।
  9. शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण होना शुभ नहीं माना जाता। यदि ऐसा है तो वह व्यक्ति जेल जा सकता है, या दुष्कर्मी बनता है। 
  10. यदि चंद्र रेखा पर चतुष्कोण बना हुआ है तो व्यक्ति अपने जीवन में अनेक बार विदेश यात्राएं करता है।

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आपके आसपास छुपे हैं धन प्राप्ति के संकेत

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

प्राचीन ऋषि मुनियों ने अपनी सूक्ष्म और दिव्य दृष्टि के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने और उन्हें आमजन की समझ में आने लायक बनाया है। कई ज्योतिष के कई ग्रंथों में लक्षण और स्वप्न के बारे में बताया गया है। इनमें आपके आसपास हो रही घटनाओं, स्वप्नों, पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों, मनुष्यों आदि के किसी विशेष लक्षण को देखकर आपके शुभ-अशुभ के बारे में भविष्य कथन किया जा सकता है। इनमें कई लक्षण ऐसे होते हैं जो संकेत देते हैं कि आपको कब, कहां से कितना धन प्राप्त होगा। आइए जानते हैं ऐसे 20 संकेत, जिन्हें देखकर आप पता कर सकते हैं कि आपको भी धन मिलने वाला है या नहीं।


  • अगर आपके शरीर के दाहिने भाग में या सीधे हाथ में लगातार खुजली हो, तो समझ लेना चाहिए कि आपको धन लाभ होने वाला है।
  • यदि कोई सपने में देखे कि उस पर कानूनी मुकदमा चलाया जा रहा है, जिसमें वह निर्दोष छूट गया है, तो उसे अतुल धन संपदा की प्राप्ति होती है।
  • लेन-देन के समय यदि पैसा आपके हाथ से छूट जाए, तो समझना चाहिए कि धन लाभ होने वाला है।
  • जो व्यक्ति सपने में मोती, मूंगा, हार, मुकुट आदि देखता है, उसके घर में लक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती है।
  • जिसे स्वप्न में कुम्हार घड़ा बनाता हुआ दिखाई दे, उसे बहुत धन लाभ होता है।
  • सोकर उठते ही सुबह-सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए, तो समझना चाहिए कि आपके द्वारा उधार दिया गया पैसा बिना मांगे ही लौटने वाला है।
  • गुरुवार के दिन कुंवारी कन्या पीले वस्त्रों में दिख जाए, तो यह धन लाभ होने का संकेत है।
  • अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रह हैं और उसी समय आपकी जेब से पैसे गिरें, तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत है।
  • सपने में अगर किसी को धन उधार देते हैं, तो अत्यधिक धन की प्राप्ति होती है।
  • कहीं जाते समय नेवला रास्ता काटे या कहीं नेवला दिखे तो यह शुभ संकेत होता है। 
  • आप सोकर उठे हों और उसी समय नेवला आपको दिख जाए तो गुप्त धन मिलने की संभावना रहती है।
  • सपने में पका हुआ संतरा देखें तो शीघ्र ही अतुल धन संपत्ति प्राप्त होती है।
  • शुक्रवार के दिन कपिला गाय (केसरिया रंग की) के दर्शन हो तो समझना चाहिए कहीं से अचानक धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं।
  • सपने में स्वयं को फल खाते देखें तो धन लाभ होता है। 
  • कुत्ता यदि अचानक धरती पर अपना सिर रगड़े और यह क्रिया बार-बार करे तो उस स्थान पर गड़ा धन होने की संभावना होती है।
  • जो व्यक्ति सपने में मूत्र, वीर्य, विष्ठा व वमन का सेवन करता देखे, वह निश्चित ही महाधनी हो जाता है।
  • सपने में ऊंट दिखाई दे, तो अपार धन लाभ होता है। 
  • जो व्यक्ति  सपने में स्वयं को केश विहीन (गंजा) देखता है, उसे अतुल्य धन की प्राप्ति होती है।
  • जो सपने में खेत में पके हुए गेहूं देखता है, वह शीघ्र ही धनवान बन जाता है।
  • सपने में जिसके दाहिने हाथ में सफेद रंग का सांप काट ले, उसे बहुत से धन की प्राप्ति होती है।

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Sunday, 8 April 2018

वास्तु टिप्स : इन चीजों को रखें घर से बाहर, वरना नहीं टिकेगा धन

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

वास्तु शास्त्र दिशाओं के साथ-साथ वस्तुओं पर भी निर्भर करता है। हमारे घर में कई ऐसी वस्तुएं होती हैं जिनसे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। और यदि घर में नकारात्मक ऊर्जा अधिक है तो वहां रहने वालों को कभी भी सुख प्राप्त नहीं होता। आमतौर पर लोगों को जानकारी नहीं होती है कि घर में कौन सी चीजें नकारात्मक ऊर्जा दे रही है। आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ वस्तुओं के बारे में जिन्होंने आपका सुख छीन रखा है।


  • घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। फर्श, दीवारों, छत, फर्नीचर आदि में जमी धूल गंदगी भयंकर नेगेटिव एनर्जी का उत्पादन करती है। इससे आपकी आय बाधित होती है। घर में सुखों का अभाव रहता है।
  • रद्दी, टूटे हुए फर्नीचर, टूटे हुए कांच घर में नहीं होना चाहिए। इनसे आर्थिक समृद्धि में बाधा आती है।
  • चीनी और कांच के टूटे हुए कप, गिलास का इस्तेमाल बिलकुल न करें। बर्तन भी टूटे हुए नहीं होना चाहिए।
  • टपकते नल आपके घर में पैसा टिकने नहीं देते। यदि घर का कोई भी नल लीक कर रहा हो तो उसे तुरंत ठीक करवाएं।
  • लोग अक्सर घरों में सजावट के लिए कंटीले पौधे लगा लेते हैं, बेशक इनमें फूल तो अच्छे खिलेंगे, लेकिन ये आपक सुख छीन लेंगे।
  • मकड़ी के जाले सभी घरों में हो ही जाते हैं, इन्हें समय-समय पर साफ करते रहें। ये आपकी तरक्की में रूकावट डालते हैं।
  • शू रैक घर के बाहर रखें। छोटे घरों और खासकर फ्लैट में शू रैक घर में ही रखे जाते हैं। यह गलत है। शू रैक बाहर रखें।
  • नकली फूलों को घर में बिलकुल न रखें। ये बेजान होते हैं इससे पारिवारिक संबंधों में परेशानी आती है।
  • फटे कपड़े भूलकर भी न पहनें। ये दरिद्रता लाते हैं। 
  • जूठे बर्तन रात को न रखें। इन्हें मांजकर रखना चाहिए। यदि रखे रहें तो इनमें पानी भर देना चाहिए।
  • हम घरों में अगरबत्ती जलाते हैं। इनमें बांस होता है। घर में बांस जलाना अशुभ होता है। इनके स्थान पर धूप बत्ती लगाएं।

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सही संख्या में करेंगे नवग्रहों के मंत्र का जाप तो ही मिलेगा शुभ परिणाम

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मनुष्य का संपूर्ण जीवन नवग्रहों से प्रभावित रहता है। व्यक्ति के जीवन में आने वाले सुख-दुख, उतार-चढ़ाव, लाभ-हानि, रोग आदि ग्रहों के अनुसार आते-जाते हैं। व्यक्ति परेशानियों से मुक्ति के लिए इन्हीं नवग्रहों या इनसे संबंधित देवी-देवताओं की पूजा करता है, उनके मंत्रों का जाप करता है, उन ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान करता है। और इन सब कार्यों का शुभ और सकारात्मक परिणाम तभी मिलता है, जब इन्हें पूर्ण विधि-विधान और नियमों के साथ किया जाए।


आइये जानते हैं किस ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कितने मंत्रों का किस समय जाप करना चाहिए और किन चीजों का दान करना चाहिए: 

सूर्य : जन्म कुंडली में सूर्य खराब परिणाम दे रहा हो तो व्यक्ति को मान-सम्मान, पिता का सुख प्राप्त नहीं होता। उसके जीवन में तरक्की नहीं होती और हर कदम पर रूकावटें आती हैं। नेत्र रोग होते हैं। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का 7 हजार बार जाप करना चाहिए। यह जाप सूर्योदय के समय करना होता है। सूर्य के निमित्त तांबा, गेहूं, गुड़, लाल कमल, गौ, केसर, लाल कपड़े का दान किया जाता है।

चंद्र : चंद्र खराब होने पर व्यक्ति को मानसिक रोग परेशान करते हैं। उसकी मानसिक स्थिति खराब रहती है। आत्मविश्वास की कमी रहती है। मिर्गी और फेफड़ों के रोग होते हैं। चंद्र को प्रसन्न करने के लिए ऊं श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः मंत्र का 11 हजार जाप शाम के समय करें। चंद्र के निमित्त चांदी, मोती, शंख, चावल, मिश्री, सफेद फूल और कपूर दान करें।

मंगल : मंगल की अशुभता से व्यक्ति भयभीत रहता है। उसके पराक्रम, बल में कमी बनी रहती है। रक्त संबंधी बीमारियां उसे घेरे रहती है और विवाह कार्य में रूकावट आती है। मंगल को प्रसन्न करने के लिए ऊं क्रां क्रीं क्रौं सः मंगलाय नमः मंत्र के 10 हजार जाप सूर्योदय के समय करें। मंगल के निमित्त तांबा, गुड़, गेहूं, शक्कर, लाल कपड़ा, मसूर की दाल, लाल चंदन का दान करें।

बुध : बौद्धिक चतुराई, व्यापार-व्यवसाय का प्रतिनिधि ग्रह बुध अशुभ हो तो व्यक्ति हर मोर्चे पर असफल साबित होता है। बुध को प्रसन्न करने के लिए ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र के 9 हजार जाप सूर्योदय से पहले करें। बुध को अनुकूल बनाने के लिए हरा कपड़ा, मूंग, कांस्य पात्र, घी, और मिश्री का दान करना श्रेष्ठ रहता है।

गुरु : वैवाहिक कार्य, तर्क शक्ति और पद-प्रतिष्ठा बृहस्पति शुभ हो तभी मिलते हैं। अन्यथा नहीं। गुरु को प्रसन्न करने के लिए ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः मंत्र के 19 हजार जाप शाम के समय करें। सोना, लड्डू, चने की दाल, पीले कपड़े, हल्दी, नमक दान करने से गुरु की अनुकूलता प्राप्त होती है।

शुक्र : सुख, सौंदर्य, भोग विलास और भौतिक सुख शुक्र से ही प्राप्त होते हैं। इसलिए शुक्र को प्रसन्न करने के लिए ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः के 16 हजार जाप करें और श्वेत वस्त्र, श्वेत चंदन, घी, चावल, चीनी, दूध, दही का दान करें।

शनि : शनि ठीक नहीं हो तो पूरा जीवन कष्टों और अभावों में गुजरता है। शनि को प्रसन्न करने के लिए ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः मंत्र के 23 हजार जाप दोपहर के समय करें। तिल, तेल, उड़द, लौह पात्र, काला कपड़ा दान करें।

राहु : राहु को प्रसन्न करने के लिए ऊं छ्रां छ्रीं छ्रौं सः राहवे नमः के 18 हजार जाप आधी रात को करें। राहु की अनुकूलता पाने के लिए कंबल, तिल, तेल, नारियल, सीसा का दान करें। राहु अशुभ हो तो व्यक्ति दुश्मनों से घिरा रहता है। 

केतु : केतु के लिए ऊं स्त्रां, स्त्रीं, स्त्रौं सः केतवे नमः मंत्र के 18 हजार जाप सूर्योदय से पूर्व करें। तिल, कंबल, चीनी का दान करने से केतु प्रसन्न होंगे।

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Friday, 6 April 2018

आखिर क्या है पांच स्वर्ण तीरोें का रहस्य

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत की मूल कहानी तो लगभग सभी को पता है, लेकिन उसमें ऐसी कई छोटी-छोटी घटनाएं समाई हुई हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। ऐसी ही एक घटना पांच स्वर्ण तीरों के बारे में है।



महाभारत के अनुसार जब कौरव कुरुक्षेत्र का युद्ध हार रहे थे, तो इससे क्रोधित होकर दुर्योधन एक रात पितामह भीष्म के पास जा पहुंचा। दुर्योधन ने भीष्म पर आरोप लगाया कि वे पांडवों के प्रेम में पड़कर कौरवों की ओर से ठीक से युद्ध नहीं कर रहे हैं, इसलिए कौरवों के महारथी लगातार युद्ध में मारे जा रहे हैं। दुर्योधन के ये शब्द सुनकर भीष्म को क्रोध आ गया। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर कुछ मंत्र पढ़े। तभी उनके हाथ में स्वर्ण से बने पांच तीर आ गए। यह देखकर दुर्योधन चौंक गया। भीष्म ने कहा इन पांच स्वर्ण तीरों से मैं प्रातः युद्ध प्रारंभ होते ही पांचों पांडवों का अंत कर दूंगा।

भीष्म की इन बातों पर दुर्योधन को विश्वास नहीं हुआ। उसे संदेह था कि कहीं सुबह तक भीष्म का मन न बदल जाए, या कोई इन स्वर्ण तीरों को चुरा न ले इसलिए उसने भीष्म से वे पांच तीर यह कहते हुए मांग लिए कि वे तीर उसके पास सुरक्षित रहेंगे और सुबह युद्ध के समय उन्हें तीर लौटा देगा। भीष्म ने दुर्योधन को सोने के पांचों तीर दे दिए।

इस घटना का भान श्रीकृष्ण को हो गया। उन्होंने तत्काल अर्जुन को बुलवा भेजा। अर्जुन के पहुंचते ही श्रीकृष्ण ने उसे दुर्योधन द्वारा वरदान देने की बात याद दिलाई। दरअसल दुर्योधन द्वारा अर्जुन को वरदान देने की घटना कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले की है, जब पांडव वनवास भोग रहे थे। जिस जंगल में पांडव अपनी पहचान छुपाकर रह रहे थे, उसी के ठीक सामने एक सरोवर के किनारे दुर्योधन ने शिकार के दौरान अपना शिविर लगा रखा था। जब दुर्योधन सरोवर में स्नान कर रहा था तभी एक गंधर्व वहां से गुजरा तो दोनों में युद्ध होने लगा। गंधर्व ने दुर्योधन को परास्त कर दिया और वह उसे बंदी बनाकर ले जाने लगा, तभी अर्जुन ने आकर दुर्योधन को गंधर्व से मुक्त कराया था। यह देख दुर्योधन अत्यंत प्रसन्न हुआ और उसने अर्जुन को वरदान मांगने को कहा। अर्जुन ने दुर्योधन से तत्काल वरदान न मांगते हुए यह कहा कि उसे जब जरूरत होगी तब वर मांग लेगा।  

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह घटना याद दिलाते हुए दुर्योधन से वरदान मांगने को कहा। अर्जुन ने ऐसा ही किया। वह उसी रात दुर्योधन के पास पहुंचा और पूर्व की घटना याद दिलाते हुए वरदान के रूप में उससे स्वर्ण के वे पांच तीर मांग लिए। दुर्योधन को इस बात पर क्रोध भी आया और आश्चर्य भी हुआ, लेकिन चूंकि वह सच्चा क्षत्रिय था इसलिए उसने अपना वचन पूरा किया। उसने अर्जुन को वे पांचों तीर दे दिए। 

अगली सुबह दुर्योधन पुनः भीष्म के पास पहुंचा और पूरी घटना बताते हुए दोबारा अभिमंत्रित तीर मांगे, लेकिन भीष्म ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया। इस तरह दुर्योधन के एक वचन और गलती के कारण भीष्म के हाथों पांडवों की मृत्यु होने से बच गई।

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सभी प्रकार के वास्तुदोष दूर करता है कर्पूर

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हिंदू पूजा पद्धति में कर्पूर का विशेष स्थान है। पूजा के बाद आरती में कर्पूर का उपयोग किया जाता है। कर्पूर के बिना आरती अधूरी मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कर्पूर का उपयोग क्यों किया जाता है। भारतीय पूजा पद्धति एक वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्रत्येक पदार्थ का एक वैज्ञानिक महत्व है। यूं ही किसी वस्तु का उपयोग नहीं किया जाता। कर्पूर जलाने का भी वैज्ञानिक महत्व है। घर में कर्पूर जलाने से बैक्टीरिया, कीटाणु नष्ट होते हैं और यह नकारात्मक उर्जा को सकारात्मक उर्जा में परिवर्तित करता है। इसके अलावा कर्पूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसीलिए वेदों के साथ आयुर्वेद में भी कर्पूर का वर्णन प्रमुखता से किया गया है। ज्योतिषीय और वास्तु उपायों में भी कर्पूर का बहुतायत में उपयोग बताया गया है। 


कर्पूर मुख्यतः तीन प्रकार का होता है हिंदुस्तानी देसी या पत्री कर्पूर, भीमसेनी या बरास कर्पूर और चीनी या जापानी कर्पूर। इन तीनों प्रकारों के अलावा आजकल सिंथेटिक कर्पूर भी मिलता है। तो आइये जानते हैं वास्तु शास्त्र में कर्पूर का क्या महत्व है और यह किस तरह अपना प्रभाव दिखाता है:

  • जिस घर में नियमित कर्पूर जलाया जाता है, वहां की वायु स्वच्छ रहती है। दूषित वायु घर से बाहर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। सुबह-शाम कर्पूर जलाने से बाहरी नकारात्मक उर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यही कारण है कि हवन, पूजा पद्धति में कर्पूर का उपयोग किया जाता है।
  • देसी कर्पूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। खासकर प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कर्पूर जलाना चाहिए।
  • कर्पूर जलाने से बैक्टीरिया, कीटाणु, मच्छर आदि घर में प्रवेश नहीं करते।
  • कर्पूर को बारीक पीसकर पानी में डालकर पोंछा लगाने से चींटी, कीड़े नहीं आते।
  • किसी भी प्रकार के वास्तुदोष को दूर करने में कर्पूर प्रभावी असर दिखाता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कर्पूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है। और वास्तुदोष भी समाप्त होता है।

कैसे उतारे नजर

कपूर का एक टुकड़ा लेकर जिस व्यक्ति पर नजर हो उसके पैर से लेकर सिर तक घड़ी के घूमने की दिशा में तीन बार उतारें और वहीं फर्श पर कपूर जला दें। कपूर जलाते समय ध्यान रखें इसे पहले से किसी जलते हुए अंगारे या अन्य अग्नि के साधन पर न रखें, बल्कि इसे सीधे फर्श पर रखकर आग लगा दें। नजर उतारने के लिए भीमसेनी कपूर का इस्तेमाल करना चाहिए। 

कपूर से कैसे पता करें बुरी नजर है या नहीं


  • यदि कपूर जलाने पर उसकी लौ स्थिर रहे और उसमें से धुआं बिलकुल न निकलें तो समझें कोई बुरी नजर नहीं है।
  • यदि कपूर जलाने पर उसकी लौ थोड़ी इधर-उधर जाए, लेकिन धुआं न करे तो नजर का हल्का प्रभाव होता है।
  • यदि जलते कपूर की लौ बिना हवा के बार-बार इधर-उधर हो और उसमें से धुआं भी निकले तो निश्चित रूप से बुरी नजर होती है।
  • कपूर जलाने पर उसमें से तेज धुआं निकले और उसकी लौ भी अस्थिर हो तो समझो कड़ी नजर ने जकड़ रखा है।
  • जलते कपूर में से यदि तड़कने, चर-चर की आवाज के साथ धुआं निकले और लौ तेजी से अस्थिर रहे तो सबसे कड़ी नजर होती है।


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Thursday, 5 April 2018

15 अप्रैल से बुध हो रहे हैं मार्गी, बिजनेस वालों को मिलेंगे सुनहरे मौके

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

ज्ञान, बुद्धि, विवेक, चतुराई और व्यापार, व्यवसाय का प्रतिनिधि ग्रह बुध 15 अप्रैल रविवार को रेवती नक्षत्र में दोपहर 2 बजकर 53 मिनट पर मार्गी हो रहा है। बुध 22 मार्च को वक्री हुआ था और अब 25 दिन बाद यानी 15 अप्रैल को सीधी चाल चलने लगेगा। बुध के वक्री होने के कारण व्यापारियों को कुछ मामलों में परेशानी और धंधा मंदा होने जैसी समस्या से जूझना पड़ा। वहीं बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों, लेखकों, उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी यह समय असफलता वाला साबित हुआ। लेकिन अब बुध के मार्गी होने से संकट का समय बीतने वाला है।


आइये जानते हैं किन लोगों और प्रोफेशन से जुड़े लोगों को मार्गी बुध लाभ पहुंचाएगा:

व्यापारियों के लिए :
व्यापार, व्यवसाय कर रहे लोगों को वक्री बुध के कारण व्यापार में हानि, पैसा कहीं फंसना, मनचाहा लाभ नहीं मिलना, व्यापार में घाटा जैसी अनेक समस्याओं से जूझना पड़ा। इन 25 दिनों में कई लोगों का व्यापार बंद होने की कगार तक पहुंच गया। कई कंपनियां दिवालिया हो गई। अब 15 अप्रैल से बुध के मार्गी होते ही बिजनेस में तरक्की के दिन शुरू होंगे। नए व्यापार-व्यवसाय प्रारंभ करने के सुनहरे मौके आएंगे। जिन लोगों का व्यापार विस्तार अब तक टलता आ रहा है वे विस्तार करेंगे। साझेदारी के काम सफल होंगे। 

ये उपाय करें: इसके लिए बस इतना करना होगा कि बुध के मार्गी होने के दिन यानी 15 अप्रैल को गणपति मंदिर में बेसन की मिठाई का नैवेद्य लगाएं और यह प्रसाद गरीब बच्चों में बांट दें।

विद्यार्थियों के लिए :
बुध के वक्री होने की दशा में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थी भी बेहद तनाव में रहे। इन्हें परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा में मनमुताबिक सफलता नहीं मिली। कई विद्यार्थियों का विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना पूरा नहीं हो पाया। कई विद्यार्थियों को कॉलेजों में अपनी पसंद का सब्जेक्ट नहीं मिला, लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। 15 अप्रैल से ये सारी समस्याएं दूर होने वाली हैं। विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा हो जाएगा, क्योंकि बाधाएं समाप्त हो जाएंगी। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलेगी। मानसिक शांति और मन में भरपूर आत्मविश्वास रहेगा। 

ये उपाय करें: विद्यार्थियों को बस इतना करना है कि 15 अप्रैल को गणपति मंदिर में 108 हरी दुर्वा अर्पित करें। गाय को हरा चारा खिलाएं।

लेखकों, बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए :
बुध ग्रह लेखन, पठन-पाठन, बौद्धिक क्षमता, दिमागी कार्य करने वाले लोगों का प्रतिनिधि ग्रह है। वक्री बुध के कारण लेखकों, पत्रकारों को अपने प्रोफेशन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई पत्रकारों की नौकरी इस दौरान छूट गई। लेखकों को उनके कार्य की भयंकर आलोचना सहना पड़ी। उनका मान-सम्मान छिन गया। लेकिन अब बुध के मार्गी होने से उनका खोया सम्मान, पद, पैसा पुनः लौट जाएगा। लेखकों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर का कोई सम्मान मिल सकता है। पत्रकारों के कार्य की प्रशंसा होगी, पद बढ़ेगा। साथ ही विभिन्न प्रकार के बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोग जीवन में अपनी सफलता का आनंद उठाएंगे।

ये उपाय करें: लेखक 15 अप्रैल के दिन गणपति मंदिर में हरे रंग के कवर वाली एक डायरी और हरे रंग की स्याही वाला पेन भेंट करें।

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सोमवती अमावस्या और सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग, 16 अप्रैल को सोमवती अमावस्या


पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

16 अप्रैल सोमवार को आ रही सोमवती अमावस्या पर इस बार चार शुभ संयोग बन रहे हैं। वैशाख मास, सोमवती अमावस्या, सर्वार्थसिद्धि योग और अश्विन नक्षत्र। इन सभी का शुभ संयोग मिलकर सोमवती अमावस्या को विशेष बना रहा है। यह अमावस्या धन प्राप्ति और जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने वाली साबित होगी, लेकिन उसके लिए कुछ खास उपाय करना होंगे।


सोमवती अमावस्या के दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। शास्त्रों का कथन है कि इस दिन किया गया दान हजार गुना अधिक फलदायी होता है। इस दिन गरीबों को भोजन करवाना, वस्त्र भेंट करना, फलों का दान आदि करने से जीवन की समस्त बाधाओं को दूर किया जा सकता है। इससे धन, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा और समस्त प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त किया गया दान पितृ दोष और कालसर्प दोष से भी मुक्ति दिलाता है।

शुभ संयोग का क्या होगा असर

वैशाख मास में आ रही सोमवती अमावस्या का अधिक महत्व है। वैशाख मास भगवान शिव और विष्णु का प्रिय माह है और इसमें सोमवती अमावस्या का आना दान-पुण्य के लिहाज से अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन सवार्थसिद्धि योग भी बन रहा है, जिसमें किए गए समस्त कार्य तुरंत शुभ फलदायी होते हैं। इसके अलावा इस दिन नक्षत्र मंडल का प्रथम नक्षत्र अश्विनी भी है। अश्विनी नक्षत्र के देवता श्रीगणेश होने से यह दिन ज्ञान, बुद्धि बढ़ाने वाला साबित होगा।

क्या करें इस दिन

सोमवती अमावस्या के दिन समस्त ग्रह-नक्षत्रों और देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष उपाय करें, इससे आपका जीवन सुखों से भर जाएगा।

1. सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। नदी ना हो तो घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष में एक तांबे के कलश से शुद्ध अर्पित करें और पीपल की सात परिक्रमा करें। इससे समस्त ग्रह दोष शांत होते हैं। उग्र ग्रहों की पीड़ा दूर होती है। समस्त सुखों की प्राप्ति होगी और धन संपदा में वृद्धि होगी।

2. कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए सोमवती अमावस्या के दिन किसी ऐसे शिवलिंग पर तांबे या अष्टधातु का नाग लगवाएं जहां अब तक कोई नाग नहीं लगा हुआ है। नाग लगवाने के बाद विधि-विधान से उसकी पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए कच्चे दूध से अभिषेक करें।

3. लगातार धन की हानि हो रही है। बिजनेस अच्छा नहीं चल रहा है। नौकरी में तरक्की नहीं हो रही है तो सोमवती अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे आटे के सात दीपक बनाकर उनमें सरसों का तेल भरकर जलाएं। पीपल की 21 पदक्षिणा करें और बिना पीछे देखे चुपचाप घर चले आएं। शीघ्र शुभ समाचार मिलने लगेंगे।

4. दांपत्य जीवन में परेशानी आ रही है। पति-पत्नी में विवाद होते रहते हों, गृह क्लेश बना हुआ है तो पीपल में मीठा दूध अर्पित करें। किसी बगीचे में खुशबूदार फूलों के पौधे लगाएं। इससे आपसी संबंधों में प्रेम बढ़ेगा।

5. घर-परिवार में कोई बीमार चल रहा हो तो सोमवती अमावस्या के दिन रोगी के सिर के उपर से एक नारियल घड़ी की उल्टी दिशा में 21 बार उसारकर बहते जल में प्रवाहित करें। इससे रोगी शीघ्र ठीक होने लगेगा।

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Wednesday, 4 April 2018

क्यों जरूरी है परिक्रमा?

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

हिंदू पूजा पद्धति में देवी-देवता की परिक्रमा करने का विधान है। इसीलिए मंदिरों में परिक्रमा पथ बनाए जाते हैं। सिर्फ देवी-देवताओं की ही नहीं पीपल, अश्वत्थ, तुलसी समेत अन्य शुभ प्रतीक पेड़ों के अलावा, नर्मदा, गंगा आदि की परिक्रमा भी की जाती है क्योंकि सनातन धर्म में प्रकृति को भी साक्षात देव समान माना गया है। आइये जानते हैं परिक्रमा क्यों जरूरी है, किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा की जाना चाहिए, इसका महत्व क्या है और परिक्रमा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।


क्या है मान्यता

लोग कहते हैं कि परिक्रमा करनी जरूरी है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों? परिक्रमा, जिसे संस्कृत में प्रदक्षिणा कहा जाता है, इसे प्रभु की उपासना करने का माध्यम माना गया है। ऋग्वेद में प्रदक्षिणा के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है। ऋग्वेद के अनुसार प्रदक्षिणा शब्द को दो भागों प्रा और दक्षिणा में विभाजित किया गया है। इस शब्द में मौजूद प्रा से तात्पर्य है आगे बढ़ना और दक्षिणा मतलब चार दिशाओं में से एक दक्षिण की दिशा। यानी परिक्रमा का अर्थ हुआ दक्षिण दिशा की ओर बढ़ते हुए देवी-देवता की उपासना करना। इस परिक्रमा के दौरान प्रभु हमारे दाईं ओर गर्भ गृह में विराजमान होते हैं। लेकिन यहां महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि प्रदक्षिणा को दक्षिण दिशा में ही करने का नियम क्यों बनाया गया है?

दक्षिण दिशा में हो परिक्रमा

मान्यता है कि परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में ही की जाती है तभी हम दक्षिण दिशा की ओर आगे बढ़ते हैं। यहां पर घड़ी की सूई की दिशा में परिक्रमा करने का भी महत्व है। हिंदू मान्यताओं के आधार पर ईश्वर हमेशा मध्य में उपस्थित होते हैं। यह स्थान प्रभु के केंद्रित रहने का अनुभव प्रदान करता है। यह बीच का स्थान हमेशा एक ही रहता है और यदि हम इसी स्थान से गोलाकार दिशा में चलें तो हमारा और भगवान के बीच का अंतर एक ही रहता है। यह फासला ना बढ़ता है और ना ही घटता है। इससे मनुष्य को ईश्वर से दूर होने का भी आभास नहीं होता और उसमें यह भावना बनी रहती है कि प्रभु उसके आसपास ही हैं।

परिक्रमा करने का लाभ

यदि आप परिक्रमा करने के लाभ जानेंगे तो प्रसन्न हो जाएंगे। परिक्रमा तो भले ही आप करते होंगे, लेकिन शायद ही इससे मिलने वाले आध्यात्मिक एवं शारीरिक फायदों को जानते होंगे। परिक्रमा करने से हमारे स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। यूं तो हम मानते ही हैं कि प्रत्येक धार्मिक स्थल का वातावरण काफी सुखद होता है, लेकिन इसे हम मात्र श्रद्धा का नाम देते हैं। किंतु वैज्ञानिकों ने इस बात को काफी विस्तार से समझा एवं समझाया भी है। उनके अनुसार प्रत्येक धार्मिक स्थल पर कुछ विशेष प्रकार की ऊर्जा होती है। यह ऊर्जा मंत्रों एवं धार्मिक उपदेशों के उच्चारण से पैदा होती है। यही कारण है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर जाकर मानसिक शांति मिलती है। परिक्रमा से मिलने वाला फायदा भी इसी तथ्य से जुड़ा है। जो भी व्यक्ति किसी धार्मिक स्थान की परिक्रमा करता है, उसे वहां मौजूद सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह ऊर्जा हमें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है। इस तरह ना केवल आध्यात्मिक वरन् मनुष्य के शरीर को भी वैज्ञानिक रूप से लाभ देती है परिक्रमा।

किसकी कितनी बार की जानी चाहिए परिक्रमा

जिस प्रकार हिंदू धर्म में हर धार्मिक कार्य एक सम्पूर्ण विधि-विधान से युक्त होता है, ठीक इसी प्रकार से परिक्रमा करने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। परिक्रमा किस तरह से की जानी चाहिए, कितनी बार की जाए यह सब जानना जरूरी है। तभी आपके द्वारा की गई परिक्रमा फलित सिद्ध होगी। यहां हम आपको देवी-देवता की परिक्रमा कितनी बार की जानी चाहिए, इसकी जानकारी देंगे। 
  1. आदि शक्ति के किसी भी स्वरूप की, मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, मां पार्वती, इत्यादि किसी भी रूप की परिक्रमा केवल एक ही बार की जानी चाहिए।
  2. भगवान विष्णु एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए। गणेशजी और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। शिवजी की आधी परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि शिवजी के अभिषेक की धारा को लांघना अशुभ माना जाता है।

परिक्रमा में इन बातों का रखें ध्यान

परिक्रमा कितनी बार करें यह तो आपने जान लिया, लेकिन परिक्रमा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान भी रखें। क्योंकि इस दौरान की गई गलतियां आपकी परिक्रमा को बेकार कर सकती हैं। परिक्रमा करने के आपके उद्देश्य को निष्फल कर सकती हैं। आप जिस भी देवी-देवता की परिक्रमा कर रहे हों, उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। इससे आपको अधिक लाभ मिलेगा। भगवान की परिक्रमा करते समय मन में बुराई, क्रोध, तनाव जैसे भाव नहीं होना चाहिए। परिक्रमा स्वयं आपका मन शांत जरूर करती है, लेकिन उससे पहले भी आपको खुद को शांत करना होगा। एक बात का विशेष ध्यान रखें, परिक्रमा हमेशा नंगे पैर ही करें। परिक्रमा शास्त्रों के अनुसार एक पवित्र कार्य है, इसलिए पैरों में चप्पल पहनकर उसे अशुद्ध नहीं किया जाना चाहिए। परिक्रमा करते समय बातें नहीं करना चाहिए। शांत मन से परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय तुलसी, रुद्राक्ष आदि की माला पहनेंगे तो बहुत शुभ रहता है। गीले वस्त्रों से परिक्रमा करना शुभ माना गया है, और एक बार बदन गीला करने से जल्द ही सूख जाता है। इसलिए वस्त्र ही गीले कर लिए जाते हैं।

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