Tuesday, 3 April 2018

धनवान बनना है तो ये टोटके जरूर आजमाएं

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

ज्योतिष, तंत्र और टोटकों के अनूठे संयोजन से उपजी लाल किताब किसी भी व्यक्ति के जीवन को सुखी बनाने का सबसे आसान और सुलभ साधन है। लाल किताब में बताए गए टोटके आजमाकर जीवन में आ रही अनेक बाधाओं से पार पाया जा सकता है। 


आइए जानते हैं धन, सुख, सम्मान, आयु और आरोग्य प्राप्त करने के लिए लाल किताब के कौन-से अचूक और सिद्ध टोटके आजमाए जा सकते हैं।

  • यदि बिजनेस अच्छा नहीं चल रहा है तो अपने बिजनेस ऑफिस में उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में एक फिश एक्वेरियम रखें। इसमें 9 सुनहरी और एक काली मछली डालें। यदि कोई मछली इसमें मर जाती है तो उसकी जगह नई मछली डाल दें। इससे बिजनेस में तरक्की होती है।
  • यदि किसी लड़की के विवाह में परेशानी आ रही, या बात पक्की होते-होते रह जाती है तो पांच नारियल लेकर इन्हें किसी सोमवार के दिन शिवलिंग के आगे रखकर 'ऊं श्री वर प्रदाय श्री नम:" का 108 बार पाठ करें। नारियल वहीं छोड़ आएं। इससे विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं।
  • लगातार आर्थिक परेशानी बनी हुई है तो 21 शुक्रवार तक 10 वर्ष से कम आयु की पांच कन्याओं को भोजन कराएं। शीघ्र ही आर्थिक स्थिति में सुधार आने लगेगा।
  • यदि जीवन में कोई न कोई परेशानी बनी हुई है और इसके कारण आप तनाव में रहते हैं तो एक तांबे के लोटे को जल से आधा भरकर उसमें लाल चंदन डालें। रात में सोते समय इस कलश को अपने सिरहाने रखें और सुबह बिना किसी से बोले यह जल तुलसी के पौधे में डाल दें।
  • दुकान या व्यापार अच्छा नहीं चल रहा है तो शुक्ल पक्ष के किसी भी दुकान के दरवाजे के बार सुबह के समय थोड़ा सा आटा बिखेर दें। ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नहीं। यह उपाय करने से व्यापार लाभ होने लगता है।
  • शुक्रवार के दिन सवा किलो काले चने भिगोकर रख दे। शनिवार के दिन इन्हें सरसो के तेल में मिलाकर और तीन भाग कर लें। पहला भाग काले घोड़े को खिलाएं। दूसरा भाग किसी कुष्ठ रोगी को दें तथा तीसरा हिस्सा अपने सिर के ऊपर से घड़ी की उल्टी दिशा में तीन बार वारकर किसी सुनसान चौराहे पर रख आएं। ऐसा 40 दिन तक करने से व्यापार व्यवसाय में दिन दूने रात चौगुने तरक्की होने लगती है।

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Monday, 2 April 2018

नवग्रहों की पीड़ा से मुक्ति दिलाएंगे पशु-पक्षी

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

परमात्मा ने समान भावना से मनुष्य, पशु-पक्षी, पर्यावरण और प्रकृति का निर्माण किया है। इन सभी का जीवनचक्र एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। सभी एक-दूसरे पर निर्भर है। यही कारण है कि मनुष्य की गतिविधियों के अनुसार प्रकृति अपनी प्रतिक्रिया देती है और प्रकृति की प्रतिक्रिया के अनुसार पशु-पक्षी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। आपने अक्सर महसूस किया होगा कि जब प्रकृति में कुछ उथल-पुथल होने वाली हो, कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आने वाली हो तो पशु-पक्षियों का व्यवहार बदल जाता है। इसी तरह मनुष्य के भविष्य में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का संकेत भी पशु-पक्षी दे देते हैं, बस जरूरत होती है उन संकेतों को समझने की।


घरों में विभिन्न प्रकार के प्राणियों को पालने की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। इनमें पशु भी होते हैं और पक्षी भी। ज्योतिष शास्त्र में पशु-पक्षियों को पालने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी पशु या पक्षी को नहीं पाल सकता। ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों के साथ विभिन्न प्रकार के प्राणी सम्बद्ध है। उदाहरण के तौर पर किसी के लिए कुत्ता पालना शुभ हो सकता है, लेकिन किसी के लिए यह नुकसानदायक भी हो सकता है। किसी के लिए तोता, कबूतर या अन्य पक्षी पालना फायदेमंद होता है तो किसी के ग्रह इससे विपरीत प्रभाव भी दे सकते हैं। जरूरी नहीं कि अपने ग्रह से संबंधित पशु या पक्षी को पाला ही जाए, उनकी सेवा करने से भी ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त होती है:

आइये हम जानते हैं ज्योतिष के अनुसार किन ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति के लिए किन पशु-पक्षी की सेवा करना चाहिए: 

सूर्य : जन्मकुंडली में यदि सूर्य खराब हो तो घोड़े की सेवा करें। उसके चारा-पानी का प्रबंध करें। पक्षियों में बुलबुल, हंस और अन्य गाने वाली चिडि़यों के लिए अपने घर की छत पर या आंगन में दाना-पानी रखें। इन परिंदों की सेवा से सूर्य की अनुकूलता प्राप्त होती है।

चंद्र : जन्मकुंडली में चंद्र बुरे प्रभाव दे रहा हो तो कुत्ता, बिल्ली, चूहा, कछुआ, बतख, पानी की चिडि़या, कस्तूरा मछली आदि की सेवा करें। समय-समय पर पशु-पक्षियों के भोजन का प्रबंध करें। इनमें से जो पशु-पक्षी पालना चाहें उन्हें अपने घर में भी रखा जा सकता है।

मंगल : मंगल ग्रह से संबंधित पशु हैं हाथी, लोमड़ी, शिकारी कुत्ता और पक्षी हैं बाज, चील और गिद्द। जिन लोगों के पास इनमें से कोई पशु-पक्षी हो वहां जाकर आप इन पशु-पक्षियों के खाने के निमित्त कुछ भेंट दे सकते हैं। इससे मंगल ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं।

बुध : कुत्ता, बकरी, बंदर, नेवला, तोता, रेंगने वाले जीव के प्रतिनिधि ग्रह बुध हैं। यदि बुध ग्रह से संबंधित कोई पीड़ा चल रही हो तो इन पशु-पक्षियों की सेवा करें लाभ होगा। इनमें से जिन्हं आप घर में पाल सकते हैं उन्हें जरूर पालें। तोता पालकर उसकी सेवा से लाभ होता है।

गुरु : बैल, घोड़ा, हाथी, हिरण, घरेलु पशु, चील, मोर, तीतर, मछली इन पशु-पक्षियों पर बृहस्पति का शासन चलता है। इसलिए गुरु से संबंधित समस्याओं के लिए इनकी सेवा करें। यथाशक्ति इन्हें इनकी पसंद का आहार दें। मछलियों को आटे की गोली बनाकर खिलाएं। मोर को दाना खिलाएं।

शुक्र : शुक्र ग्रह से संबंधित पीड़ाओं से मुक्ति के लिए बकरी, सांड, गौरैया, कबूतर, फुदकने वाली छोटी चिडि़या के लिए दाना-पानी का प्रबंध करें। कबूतर का जोड़ा दान करने से भी शुक्र की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। गौरैया के लिए घर की छत पर दाना-पानी रखना शुभ होता है।

शनि : बिल्ली, गधा, खरगोश, भालू, उंट, भैंस, जहरीले जीव-जंतु, समुद्री मछली, उल्लू आदि शनि ग्रह से संबंधित हैं। यदि शनि की पीड़ा हो या शनि की साढ़े साती चल रही हो तो इन पशु-पक्षियों, जंतुओं की सेवा करें। किसी कुम्हार के यहां जाकर गधे को चारा खिलाएं। 

राहु-केतु : जहरीले जीव-जंतु, काले, भूरे रंग के पशु-पक्षी पर राहु-केतु का प्रभाव रहता है। इन दोनों ग्रहों की पीड़ा होने पर इन रंगों के जंतुओं की सेवा करें। लाभ मिलेगा। 

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स्वयं का मकान नहीं बन पा रहा है, ये उपाय करें

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

प्रत्येक व्यक्ति चाहता है उसका अपना मकान हो और वह अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक उस मकान में निवास कर सके, लेकिन कई लोगों की पूरी जिंदगी किराए के मकान में गुजर जाती है। जिंदगीभर मेहनत करने के बाद भी उनका अपने मकान में रहने का सपना पूरा नहीं हो पाता है। आखिर क्या कारण है कि कई व्यक्ति अपना स्वयं का मकान नहीं बना पाते। इसका जवाब उस व्यक्ति की जन्मकुंडली में छुपा होता है। ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव सुख स्थान कहलाता है। इस भाव से भूमि, भवन, संपत्ति की जानकारी हासिल की जाती है। चतुर्थ भाव की राशि, उसके कारक ग्रह, उस पर अन्य ग्रहों की दृष्टि आदि का बहुत प्रभाव पड़ता है। 


चतुर्थ भाव का कारक ग्रह होता है मंगल। यदि जन्मकुंडली में मंगल शुभ है, बलवान है तो व्यक्ति के पास अनेक भवन होते हैं। इसके विपरीत यदि कुंडली में मंगल या शनि ग्रह दूषित हो और इनसे किसी दोष का निर्माण हो रहा हो तो व्यक्ति को अपना मकान बनवाने में कठिनाई आती है। ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का अपना मकान तब बनता है, जब उन्हें शनि-मंगल की दशा या अंतर्दशा चल रही हो और शनि-मंगल का आपस में चतुर्थ भाव में कोई संबंध बन रहा हो। इस स्थिति में व्यक्ति को प्रॉपर्टी डीलिंग के बिजनेस में भी जबर्दस्त सफलता मिलती है।

यदि आपको भी अपना मकान बनवाने में रूकावटें आ रही हों। काम टलता जा रहा हो तो मंगल को प्रसन्न् करने के उपाय करने चाहिए। आइए जानते हैं मंगल ग्रह से जुड़े कौन-से उपाय करके आपका अपने भवन में जाने का सपना पूरा हो सकता है : 
  1. ज्योतिष में मंगल को भूमि और शनि को निर्माण कार्यों का कारक ग्रह माना गया है। इन दोनों ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए नियमित हनुमान आराधना करना जरूरी है।
  2. अपना मकान बनवाने का योग नहीं बन पा रहा है तो किसी भी मंगलवार से प्रारंभ करके लगातार 21 दिनों तक गाय को गुड़ खिलाएं। इससे मंगल की अनुकूलता प्राप्त होगी।
  3. प्रतिदिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर गणेशजी को लाल रंग का फूल तथा दुर्वा अर्पित करें। इससे भवन निर्माण में आ रही बाधाएं शीघ्र दूर होंगी।
  4. प्रत्येक मंगलवार के दिन भगवान शिव का केसर और शहद मिश्रित दूध से अभिषेक करें। इससे मंगल देव प्रसन्न् होंगे।
  5. नीम की लकड़ी से छोटा सा संजा-संवरा घर बनवाकर किसी मंदिर में रखें। इससे खुद का मकान बनने का रास्ता खुलता है।
  6. प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को चमेली के तेल में सिंदूर घोलकर हनुमानजी को चोला चढ़ाएं और उन्हें गुड़-चने का नैवेद्य अर्पित करें।
  7. किसी निर्जन स्थान, जंगल में पेड़ के नीचे वहीं से पत्थर इकठ्ठा करके उससे एक भवन का निर्माण करें और वन देवता से अपना मकान बनाने की प्रार्थना करें। इस उपाय से शीघ्र ही मकान की प्राप्ति होती है।

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