Monday, 14 May 2018

शनि जयंती पर साढ़ेसाती की पीड़ा से मुक्ति दिलाएगा शमी का पौधा

-- शनि जयंती 15 मई 2018 --


पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

शास्त्रों में शनि के प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, लेकिन इन सभी उपायों में से प्रमुख उपाय है शमी के पौधे की पूजा। घर में शमी का पौधा लगाकर पूजा करने से कार्यों में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। इसकी पूजा का सबसे खास दिन शनि जयंती है, जो 15 मई को है। आइए जानते हैं शनि जयंती पर शमी के पौधे के कौन-कौन से टोटके करके शनि की कृपा प्राप्त की जा सकती है।


1. यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के ऊपर किसी ने कुछ कर दिया है, या नजर लग गई है तो शनि जयंती के दिन शमी वृक्ष के पांच कांटे लेकर उन्हें गंगाजल से धोकर उन पर सिंदूर लगाकर घर की चारों दिशाओं में बाहर की तरफ लगा दें और एक कांटा छत पर फेंक दें। इससे यदि कोई बाधा होगी तो वह दूर हो जाएगी।

2. शनि की साढ़ेसाती या ढैया के प्रकोप से परेशान हैं या कुंडली में श्ानि की पीड़ा बनी हुई है तो शनि जयंती के दिन प्रात: सूर्योदय के समय स्नान करके शमी के वृक्ष में एक लोटा जल अर्पित करें। इसके नीचे सरसो के तेल के पांच दीये जलाएं। इस तेल में काले तिल और काले उड़द अवश्य डालें और वहीं बैठकर शनि स्तोत्र का 11 या 21 बार पाठ करें। इससे शनि की कृपा प्राप्त होगी।

3. धन की प्राप्ति के लिए शनि जयंती के दिन शमी के वृक्ष की लकड़ी से शनि शांति हवन करवाएं। इसके बाद गरीबों को यथाशक्ति भोजन करवाएं। भोजन में इमरती जरूर हो। हवन से प्राप्त भस्म को एक चांदी की डिबिया में भरकर अपनी तिजोरी में हमेशा रखें और प्रत्येक अमावस्या को बाहर निकालकर इसे धूप-दीप दें। इससे धन की कभी कमी नहीं होगी।

4. आयु और आरोग्य की प्राप्ति के लिए शनि जयंती के दिन शमी के वृक्ष में कच्चा दूध चढ़ाएं। शमी के वृक्ष के तने पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और आयु और आरोग्य की प्राप्ति की कामना करें। तने पर लगा सिंदूर थोड़ा सा अपने मस्तक पर लगाएं या जो बीमार व्यक्ति के मस्तक पर लगाएं। इससे रोगी शीघ्र स्वस्थ होता है और उसकी आयु में वृद्धि होती है।

क्यों खास है शमी वृक्ष

  • शमी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है। शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को शमी वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
  • शमी गणेश जी का प्रिय वृक्ष है। इसलिए उनकी आराधना में शमी के वृक्ष की पत्तियां अर्पित की जाती है। भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग की जाने वाली इस पेड़ की पत्तियों का आयुर्वेद में भी महत्व है। आयुर्वेद की नजर में शमी अत्यंत गुणकारी औषधि है। कई रोगों में इस वृक्ष के अंग काम लिए जाते हैं।
  • बिहार और झारखंड में सुबह उठने के बाद शमी के वृक्ष के दर्शन को शुभ माना जाता है। इन राज्यों में यह वृक्ष अधिकतर घरों के दरवाजे के बाहर लगा मिल जाएगा। लोग किसी भी काम पर जाने से पहले इसके दर्शन करते हैं और इसे माथे से लगाते हैं।
  • शमी वृक्ष पर कई देवताओं का वास होता है। शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए होता है। शमी के पंचाग यानी फूल, पत्तियों, जड़, टहनियों और रस का इस्तेमाल कर शनि संबंधी दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है।
  • नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन शाम के समय शमी वृक्ष का पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले शमी वृक्ष के सम्मुख अपनी विजय के लिए प्रार्थना की थी।
  • शमी की पूजा के साथ ही एक सवाल यह भी है कि इस पेड़ को घर में किस तरफ लगाना चाहिए। शमी वृक्ष को घर के मुख्य दरवाजे के बायी तरफ लगाएं। इसके बाद नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं। आपके घर और परिवार के सभी सदस्यों पर सदैव शनि की कृपा बनी रहेगी।

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जीवन में खुशहाली लाने वाला माह है 'पुरुषोत्तम मास"

-- 16 मई से अधिकमास प्रारंभ --

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

अधिकमास 16 मई से प्रारंभ हो रहा है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित रहता है, लेकिन इस दौरान धर्म-कर्म, दान से जुड़े सभी कार्य करना चाहिए क्योंकि ये विशेष फलदायी रहते हैं। अधिकमास भगवान विष्णु का माह होता है। इसमें भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में समस्त प्रकार के सुख, ऐश्वर्य, पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। अधिकमास में केवल ईश्वर के लिए व्रत, दान, हवन, पूजा, ध्यान आदि करने का विधान है। ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं अधिकमास में कौन-कौन से कर्म करना चाहिए :


मंत्र जप : अधिकमास में भगवान विष्णु के प्रिय मंत्र 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:" मंत्र या गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का नियमित जप करना चाहिए। इस मास में श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त, हरिवंश पुराण और एकादशी महात्म्य कथाओं के श्रवण से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दौरान श्रीकृष्ण, श्रीमद्भागवत, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह में भगवान विष्णु की उपासना करने का अलग ही महत्व है।

कथा श्रवण और पाठन : पुरुषोत्तम मास में श्रीहरि की कथा पढ़ने और सुनने दोनों अपार महत्व है। इस माह श्रीमद्भागत, श्रीमद्भगवदगीता का नियमित पाठ समस्त प्रकार के रोग-दोष को दूर करता है। इस मास में उपासक को जमीन पर शयन करना चाहिए। इस दौरान एक ही समय भोजन करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। यदि संभव हो तो कथा पढ़ने के समय ज्यादा से ज्यादा लोग आपकी कथा को सुनें।

विष्णु उपासना : पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु का पूजन और विष्णु सहस्त्रनाम का नियमित जाप विशेष फलदायी होता है। किसी विशेष कार्य के पूर्ण होने की कामना से यदि विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाए तो वह माह समाप्त होते-होते अवश्य पूरी होती है। शुभ फल प्राप्त करने के लिए मनुष्य को पुरषोत्तम मास में अपना आचरण पवित्र और सौम्य रखना चाहिए। इस दौरान मनुष्य को अपने व्यवहार में भी नरमी रखनी चाहिए।

दान करें : पुराणों में बताया गया है कि इस माह में व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सभी पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस माह में गरीबों को यथाशक्ति दान दिया जाता है। मान्यता है कि दान में दिया गया एक रुपया भी सौ गुना फल देता है।

दीप दान करें : पुरुषोत्तम मास में दीपदान, वस्त्र और श्रीमद्भागवत कथा ग्रंथ दान का विशेष महत्व है। इस मास में दीपदान करने से धन-वैभव के साथ ही आपको पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है।

सोना दान करें : अधिकमास के दौरान प्रतिपदा को चांदी के पात्र में घी रखकर किसी मंदिर के पुजारी को दान कर दें। इससे परिवार में शांति बनी रहती है। द्वितीया को कांसे के बर्तन में सोना दान करने से खुशहाली आती है। तृतीया को चना या चने की दाल का दान करने से व्यापार में मदद मिलती है। चतुर्थी को खारक का दान लाभदायी होता है, पंचमी को गुड़ और तुवर की दाल का दान करने से रिश्तों में मिठास बनी रहती है।

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Sunday, 6 May 2018

शनि जयंती 15 मई को, इस बार सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

न्याय के अधिपति देवता शनि महाराज का जन्मोत्सव शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या पर 15 मई मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग है। साथ ही वटसावित्री अमावस्या और भौमवती अमावस्या का संयोग भी है। इतने सारे योग में मनने वाला शनि जन्मोत्सव इस बार उन लोगों के लिए खास होगा जो शनि की साढ़ेसाती, शनि के ढैया या जन्मकुंडली में शनि की महादशा, अंतर्दशा या शनि की खराब स्थिति के कारण पीड़ित चल रहे हैं। वे लोग इस खास योग में आ रही शनि जयंती पर शनि को प्रसन्न करने के उपाय अवश्य करें, उनकी समस्त पीड़ा शांत होगी।


अमावस्या मंगलवार के दिन भरणी नक्षत्र, शोभन योग, चतुष्पद करण तथा मेष राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में आ रही है। इस साल ज्येष्ठ मास अधिकमास भी है। इसलिए प्रथम शुद्ध ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में आ रही अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह 10.57 बजे से सर्वार्थसिद्धि योग की शुरुआत होगी। इसका प्रभाव दिवस पर्यंत रहेगा। इस दिव्य योग की साक्षी में शनिदेव की आराधना जातक को विशिष्ट शुभफल प्रदान करेगी।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ये जरूर करें
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए 15 मई को शनि के वैदिक तथा बीज मंत्र ऊं खां खीं खूं सः मंदाय स्वाहाः के 21 माला जाप करें। शनिस्तवराज, महाकाल शनिमृत्युंजय स्तोत्र का पाठ तथा मंदिर में शनिदेव का तेलाभिषेक पूजन करने से शुभफल की प्राप्ति होती है। जिन जातकों को निरंतर शारीरिक पीड़ा रहती है, वे शनि जयंती पर शनिवज्रपिंजर कवच के 11 पाठ करें और उसके बाद हर दिन एक पाठ नियमित करते जाएं। इससे समस्त प्रकार के शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

शनि के निमित्त इन वस्तुओं का दान करें
शनि की शांति के लिए शनि जयंती के दिन काला उड़द, काला तिल, स्टील-लोहे के बर्तन, श्रीफल, काले वस्त्र, लकड़ी की वस्तुएं, औषधि आदि का दान करना चाहिए। भिक्षुकों को भोजन कराने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। जो गरीब लोग अपनी दवाई का खर्चा उठाने में असमर्थ हों उनके इलाज का इंतजाम करवाएं और उन्हें दवाई भेंट करें, इससे शनिदेव जल्द प्रसन्न होते हैं। कैसी भी कड़ी साढ़ेसाती हो इस उपाय से उसकी पीड़ा भी दूर हो जाती है।


शनि जयंती पर त्रिग्रही योग
ग्रह गोचर की गणना के अनुसार अमावस्या पर इस बार सूर्य, चंद्र तथा बुध का मेष राशि में त्रिग्रही युति योग रहेगा। मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगलवार को ही अमावस्या रहेगी। इस दृष्टि से मेष राशि वालों के लिए यह दिन और भी खास हो जाता है। इस दिन शनिदेव के साथ हनुमानजी की आराधना श्रेष्ठ फल प्रदान करेगी। जो लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं उन्हें इस दिन हनुमान जी को बेसन के लड्डू या हलवे का भोग अवश्य लगाना चाहिए इससे आर्थिक सम्पन्नता आती है। हालांकि तीन ग्रहों के संयोग से प्राकृतिक आपदाएं आंधी, तूफान, बारिश, विमान दुर्घटना का दुर्योग भी बन सकता है। इस दौरान देश के पश्चिमी राज्यों में भीषण गर्मी से जनहानि के संकेत हैं। बड़े राजनीतिक फेरबदल होंगे।


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रामायण में छुपे हैं रहस्यमयी सपनों के अर्थ

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

सपनों का विज्ञान जितना रहस्यमयी है उतना ही यह रोमांचित करने वाला, जिज्ञासा जगाने वाला और शोध का विषय भी है। बरसों से वैज्ञानिक सपनों की दुनिया का भेद पाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन आज तक कोई इसकी थाह नहीं ले पाया है कि आखिर सपनें क्यूं और कैसे आते हैं और इनका क्या अर्थ होता है। लेकिन भारत के प्राचीन ग्रंथों में सपनों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। 


पौराणिक दस्तावेजों की बात मानें तो भगवान शिव ने ऐसे अनेक संकेतों का उल्लेख किया है, जिनके अनुसार सपनों में मिलने वाले संकेतों को समझकर व्यक्ति आने वाली मौत को भांप सकता है। चांद का टुकड़ों में दिखना, अपने शरीर में से ही अजीब सी गंध आना, हर समय किसी के अपने साथ होने का एहसास होना, आग का रंग बदलते हुए देखना आदि कुछ ऐसे संकेत हैं जो यह बताते हैं कि बस कुछ ही दिनों में उसकी आत्मा शरीर छोड़कर जाने वाली है।

भगवान शिव ने मृत्यु के पूर्वाभास की बात कही है, किंतु वाल्मीकि रामायण में कुछ ऐसे सपनों का जिक्र आया है, जो यह बताते हैं कि किसी नजदीकी व्यक्ति पर मौत के बादल मंडरा रहे हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार दशरथ की मौत से एक रात पहले उनके पुत्र भरत को सपने में अपने पिता गोबर में नहाते दिखे थे। इसके अलावा उन्होंने सपने में काले कपड़े पहने महिलाओं को पिता के आसपास देखा था। भरत के सपने में दशरथ फूलों की माला पहने तेल पी रहे थे। राम और रावण के युद्ध से पहले त्रिजटा नाम की राक्षसी ने अपने सपने में रावण की मौत देखी थी। त्रिजटा ने सीता को स्वयं यह बताया था कि रावण की मौत कैसे होगी।

इनके अलावा ऐसे कई संकेत हैं जो सपने में यह बताते हैं कि किसी व्यक्ति की मौत का समय कब आने वाला है : 
  1. अगर आप अपने सपने में खुद को किसी यात्रा के लिए सामान बांधते देखते हैं तो आपको कुछ समय तक किसी यात्रा पर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि यह सपना आपकी मौत का संकेत है।
  2. सपने में अगर आप अपना कोई अंग स्वयं अपने हाथ से काटते दिखाई देते हैं या फिर कोई और आपका कोई अंग काटता है तो इसका अर्थ परिवार में किसी की मौत से है।
  3. अगर कोई व्यक्ति सपने में लगातार भूत देखता है तो इसका अर्थ है एक साल के भीतर उसकी मौत हो सकती है।
  4. अगर कोई व्यक्ति खुद की तेल मालिश करता या फिर गधे की सवारी करता दिखे तो यह उसकी जल्द मौत का सूचक है।
  5. सपने में खुद को नाचते-गाते देखने का अर्थ अपने ही कत्ल से है। अर्थात कोई आपको मारने वाला है। सपने में कौए को सपने में देखना भी मौत दर्शाता है।
  6. कोई स्त्री अगर सपने में खुद को किसी के साथ संभोग करते देखे या सूखे फूलों की माला पहने देखती है तो उसकी जल्द ही मौत हो जाती है।
  7. सपने में स्वयं पेड़ से गिरना भी मौत का संकेत देता है।
  8. अगर कोई स्त्री अपने सपने में खुद को सफेद बालों में देखती है तो जल्द ही उसके पति की मौत का संकेत है।
  9. सपने में काले कपड़े पहनकर घोड़े की सवारी करना मौत दर्शाता है।
  10. सपने में अपने ईष्ट देव की तस्वीर को जलते या तबाह होते देखना आने वाली मौत का संकेत देता है।

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शनि जयंती 15 मई : शनि को प्रसन्न् करने के लिए लगाएं उनका मनपसंद भोग

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य

शनि देव को कू्र ग्रह जरूर माना जाता है, लेकिन वे किसी के साथ यूं ही बुरा नहीं करते। जो लोग गलत कार्य करते हैं, धर्म विरूद्ध आचरण करते हैं उन्हें वे दंड अवश्य देते हैं। शनि देव का जन्मोत्सव यानी शनि जयंती एक ऐसा अवसर है, जिस दिन आप शनि देव को प्रसन्न् करके अपनी मनचाही मुराद पूरी कर सकते हैं। इसके लिए कुछ खास नियमों का पालन करना आवश्यक है। उन्हीं में से एक है शनि की प्रिय वस्तु का नैवेद्य। अधिकांश लोगों को पता नहीं है कि शनि देव को कौन-सी वस्तु का नैवेद्य लगाना चाहिए। 


शनि देव को काली वस्तुएं अत्यधिक पसंद हैं। इनकी पूजा में काले तिल, उड़द की दाल आदि का भोग लगाया जाता है। शनि जयंती के दिन इन वस्तुओं से बनी मीठी पूड़ी और खिचड़ी का भोग लगाने का विधान है। इससे शनि शीघ्र प्रसन्न् होते हैं और उनकी साढ़ेसाती, ढैया या महादशा-अंतर्दशा परेशान नहीं करती। लेकिन ये मीठी पुड़ी और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाई कैसे जाती है, इसकी विधि भी जान लीजिए : 

मीठी पूड़ी बनाने की विधि
आवश्यक सामग्री 
गेहूं का आटा 4 कप, दूध आधा कप, घी 2 चम्मच, चीनी आधा कप, घी या तेल तलने के लिए

बनाने का तरीका
सबसे पहले चीनी को बारीक पीस लें। फिर आटे में यह पिसी हुई चीनी और घी डालकर हाथ से अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब इस आटे को दूध की सहायता से गूंथ लें। अगर दूध कम हो तो आप पानी का प्रयोग कर सकते हैं। गूथे हुए आटे को थोड़ी देर के लिए ढंककर रख दें। अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। तेल पूरी तरह गरम हो जाए तो इसमें पूड़ी डाल दें। पूरी को अच्छी तरह से फुलाएं और दोनों तरफ से पकाइएं। चीनी के स्थान पर गुड़ का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस मीठी पूड़ी का भोग शनिदेव को लगाएंगे तो उनकी कृपा प्राप्त होगी।

उड़द दाल की खिचड़ी
आवश्यक सामग्री 
उड़द की दाल (छिलके वाली) आधा कटोरी, चावल आधा कटोरी, नमक स्वादानुसार, जीरा आधा चम्मच, हींग 2 चुटकी, लाल मिर्च पाउडर एक चौथाई चम्मच, देसी घी 2 चम्मच

बनाने की विधि
सबसे पहले एक कुकर में दाल, चावल, नमक और हल्दी डालकर चार-पांच सीटी तक पका लीजिए। इसमें इतना पानी अवश्य डालें कि अंदर का सामान जले नहीं। अब इसमें तड़का लगाना है। तड़का लगाने के लिए एक कड़ाही में घी गर्म करें। घी में हींग, जीरा और लाल मिर्च पाउडर डालें। जब जीरा भून जाए तो इसें खिचड़ी में डाल दें। यह खिचड़ी शनिदेव को अत्यंत प्रिय हैं।


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