Sunday, 10 May 2020

गुरु, शुक्र और शनि तीन ग्रह हो रहे हैं वक्री, मचेगी उथल-पुथल

पं. गजेंद्र शर्मा, ज्योतिषाचार्य 

शनि 11 मई 2020, सोमवार को सुबह 9.40 बजे मकर में वक्री,
29 सितंबर 2020 को सुबह 10.44 बजे मार्गी, कुल 142 दिन

शुक्र 13 मई 2020, बुधवार को दोपहर 12.17 बजे वृषभ में वक्री,
25 जून 2020 को दोपहर 12.21 बजे मार्गी, कुल 44 दिन

गुरु 14 मई 2020, गुरुवार को रात 9.05 बजे मकर में वक्री,
13 सितंबर 2020 को सुबह 6.10 बजे मार्गी, कुल 122 दिन

सूर्य 14 मई 2020, गुरुवार को सायं 5.16 बजे वृषभ राशि में प्रवेश करेगा


तीन बड़े और प्रमुख ग्रहों का वक्री होना प्रकृति, पर्यावरण और सामान्यजन के लिए उथल-पुथल मचाने वाला साबित हो सकता है। मकर राशि में चल रहे शनि 11 मई को वक्री हो जाएंगे। वृषभ राशि में चल रहे शुक्र 13 मई को वक्री होंगे और मकर राशि में ही चल रहे गुरु 14 मई को वक्री हो जाएंगे। इन तीन ग्रहों का एक ही सप्ताह में वक्री होना भारी संकटों वाला साबित होगा। दुर्भिक्ष, प्राकृतिक आपदाएं, भूकंप, वाहन दुर्घटनाएं, अग्निकांड, अचानक आई आपदाओं में जन हानि, जल प्रलय, रोगों में वृद्धि और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाने वाला साबित होगा। वर्तमान में जो परिस्थितियां चल रही हैं, इन ग्रहों के वक्री होने से उनमें वृद्धि होने की संभावना है।

शनि वक्रेच दुर्भिक्षं रूण्ड मुण्डा च मेदिनी
अर्थात् शनि के वक्री होने से देश-दुनिया में दुर्भिक्ष बढ़ता है। बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है। प्रलय जैसी घटनाएं होती हैं। प्रचंड गर्मी होती है। लोग बेहाल होते हैं।

गुरु वक्रे स्थिरे रोगो
अर्थात् गुरु के वक्री होने से रोगों में वृद्धि होती है।

शुक्र वक्र महर्घता
अर्थात् शुक्र के वक्री होने पर पृथ्वी पर घातक परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। अनेक लोगों की जान जाती है। दक्षिण-पश्चिम प्रदेशों के लिए भयकारक स्थिति उत्पन्न होती है।

ग्रहों के वक्री होने के संबंध में उपरोक्त श्लोकों को देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि वर्तमान में चल रही कोरोना नामक महामारी में वृद्धि होने की आशंका है। शनि 11 मई से 29 सितंबर तक कुल 142 दिन वक्री रहेंगे। शुक्र 13 मई से 25 जून तक कुल 44 दिन वक्री रहेंगे। इसी तरह गुरु 14 मई से 13 सितंबर तक 122 दिन वक्री रहेंगे। यदि इन ग्रह परिस्थितियों को कोराना के संदर्भ में देखा जाए तो इस महामारी से 29 सितंबर के बाद ही राहत मिलने के आसार हैं। इसमें भी 25 जून के बाद का समय अधिक घातक साबित हो सकता है। 

उभर सकता है नया रोग

शनि और गुरु के एक ही राशि में स्थिति होकर वक्री होना इस बात का भी संकेत दे रहा है कि कोरोना के अलावा किसी अन्य प्रकार के रोग के उभरने की आशंका भी प्रबल हो रही है। या कोई पुराना रोग ही फिर से अपने पैर पसार सकता है, जिसके प्रभाव से जनता बेहाल होगी। इस समय में राष्ट्रों में मतभेद चरम पर होंगे। युद्ध जैसे हालात भी बन सकते हैं। दुनिया की अर्थव्यवस्था में जबर्दस्त तरीके से गिरावट देखने को मिलेगी। विमान और रेल दुर्घटना, भीषण अग्निकांड, परमाणु विस्फोट, समुद्र में उथल-पुथल, आंधी-तूफान, अतिवृष्टि की आशंका भी है। शनि-बृहस्पति का द्वंद्व योग इन सभी घटनाओं का कारक बन सकता है।

Friday, 3 April 2020

क्या खास बात है 5 अप्रैल को रात 9 बजे, 9 मिनट दीया जलाने में

- पं. गजेंद्र शर्मा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे प्रत्येक देशवासी का हौसला बढ़ाने के लिए 5 अप्रैल रविवार को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए अपने-अपने घरों की दहलीज पर या बालकनी में दिया या मोमबत्ती जलाने का आग्रह किया है। आखिर 5 अप्रैल ही क्यों और रात को 9 बजे 9 मिनट के लिए ही क्यों? क्या इसके पीछे कोई साइंस है या कोई ज्योतिषीय गणना। बहरहाल प्रधानमंत्री की इस घोषणा की अलग-अलग मानसिकता वाले लोग अपने-अपने तरीके से व्याख्या कर रहे हैं। कई इसकी हंसी उड़ा रहे हैं तो कई लोग इसके समर्थन में सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी सहमति जता रहे हैं। एक एस्ट्रोलॉजर होने के नाते मैं इसकी व्याख्या अपने तरीके से करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं यह किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं लिख रहा हूं, बल्कि जो अंक ज्योतिष और वैदिक ज्योतिष की गणना कहती है, वही बताने की कोशिश कर रहा हूं।

क्या कहता है अंक ज्योतिष

अंक ज्योतिष में अंक 9 का प्रतिनिधि ग्रह होता है मंगल। 5 अप्रैल, यानी 5 तारीख और चौथा महीना, इनका कुल जोड़ हुआ 9, रात 9 बजे, 9 मिनट। मंगल को अग्नि, तेज, शक्ति, बल, ताकत, साहस, हिम्मत, आत्मविश्वास का ग्रह माना जाता है। तारीख, समय और समयावधि, तीनों के अंक 9 हैं। ऐसे में यह पूर्ण मंगल का योग बना रहा है। ऐसे में मंगल की ऊर्जा को बढ़ाने का लाभ संपूर्ण वातावरण को होगा। इस समय में यदि अपने आसपास दीये जलाकर महामृत्युंजय मंत्र, ओम या मंगल के मंत्र ऊं भौं भौमाय नम: का जाप किया जाए तो इससे मंगल को शक्ति प्राप्त होगी और हमारे भीतर इस कोरोना रोग से लड़ने की शक्ति आएगी।

क्या कहता है वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष की गणना देखें तो 5 अप्रैल को रात 9 बजे की कुंडली यदि बनाई जाए तो उसमें तुला लग्न की कुंडली आ रही है, जिसमें संक्रामक रोगों का कारण ग्रह राहु नवम स्थान में बैठा है। नवम स्थान भाग्य भाव होता है, जो इस समय देश के साथ प्रत्येक व्यक्ति के भाग्य को भी प्रभावित कर रहा है। राहु की नवम स्थान में मौजूदगी और तृतीय स्थान में केतु की उपस्थिति के कारण कालसर्प दोष भी बना हुआ है। इस समय दीया जलाने से कालसर्प दोष की शांति होगी जिससे संकटकाल जल्द समाप्त होगा। यदि रात 5 अप्रैल रात 9 बजे चंद्र की स्थिति देखी जाए तो चंद्र इस समय सूर्य की राशि सिंह में रहेगा। दीया जलाने से चंद्र को सूर्य की शक्ति भी प्राप्त होगी और फलस्वरूप यह हमारे आत्मबल और मानसिक शक्ति को तीक्ष्ण करेगा। मन और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।

कैसा दीया जलाएं

- आप अपने घर में चौमुखी दीया जलाएं तो ज्यादा लाभ होगा। क्योंकि कालसर्प दोष के निवारण और राहु की शांति के लिए चौमुखी दीये का बड़ा महत्व है।
- दीये में आप अलग-अलग तरह के तेल का उपयोग कर सकते हैं।
- चमेली के तेल का दीया जलाने से मंगल को बल मिलता है। यदि चमेली के तेल का दीया जलाते हैं तो इसमें थोड़े से उड़द के दाने डाल दें।
- सरसो के तेल का दीया जलाने से शनि और राहु दोनों शांत होते हैं। सरसो के तेल के दीये में एक लौंग डाली जा सकती है।
- तिल के तेल का दीया जलाने से भी कालसर्प दोष की शांति होती है। इसमें आप एक लौंग डाल दें।
- यदि आप घी का दीया जलाते हैं तो उसमें कपूर का टुकड़ा डाला जा सकता है।
- अन्य किसी भी प्रकार के तेल का उपयोग करते हैं तो सभी में कपूर का टुकड़ा जरूर डाल दें।
- इस दिन महामृत्युंज मंत्र के जाप करना निश्चित रूप से लाभदायक होता है।

5 अप्रैल रात 9 बजे यह होगी ग्रह स्थिति

  • सूर्य मीन में, चंद्र सिंह में, बुध कुंभ में, शुक्र वृषभ में, मंगल-गुरु-शनि मकर में, राहु मिथुन में, केतु धनु राशि में रहेगा।
  • इस ग्रहीय स्थिति के अनुसार कालसर्प दोष बना हुआ है। राहु नवम स्थान में और केतु तृतीय स्थान में रहेगा।
  • इस समय राहु नवम भाव यानी भाग्य भाव में रहेगा, जो देश के भाग्य को प्रभावित कर रहा है।
  • यदि 5 अप्रैल को रात 9 बजे दीया जलाएंगे तो राहु की शांति होगी। क्योंकि राहु संक्रामक रोगों का कारण ग्रह होता है।
  • इस समय की कुंडली में शुक्र की महादशा में चंद्र का अंतर चल रहा होगा।
  • 5 अप्रैल को शात 7.24 बजे से त्रयोदशी प्रारंभ होगी।

5 अप्रैल को है रवि प्रदोष व्रत

एक अन्य संयोग की बात करें तो 5 अप्रैल को रवि प्रदोष व्रत है। रविवार के साथ प्रदोष व्रत का आना बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह प्रदोष समस्त प्रकार के रोग निवारण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। निरोगी जीवन और लंबी आयु के लिए सदियों से यह व्रत किया जाता रहा है। तंत्र शास्त्र का मत है कि प्रदोष काल में यदि कोई अपने घर की चौखट पर चौमुखी दीपक जलाए तो उसके घर में रोग प्रवेश नहीं करते। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दिन प्रदोषकाल में दीपक जलाकर महामृत्युंज मंत्र के जाप किए जाएं तो निश्चित रूप से आयु और आरोग्य प्राप्त होता है।